New Delhi,
भारत ने अफ्रीका में अपने आर्थिक प्रभाव को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के Export-Import Bank ने Africa Finance Corporation को 100 मिलियन डॉलर का पांच वर्ष का ऋण प्रदान किया है। यह पहल भारत की रणनीतिक ऋण नीति और व्यापार साझेदारी को दर्शाती है।
अफ्रीका में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की सक्रियता
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अफ्रीका में व्यापार, निवेश और निर्यात ऋण सहायता को लगातार बढ़ा रहा है। इस क्षेत्र में भारत को चीन, यूरोप, खाड़ी देशों और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे प्रमुख देशों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भारत अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में लगा हुआ है। इस ऋण के माध्यम से अफ्रीका के विभिन्न देशों में आधारभूत ढांचा और औद्योगिक परियोजनाओं को गति मिलेगी। वैश्विक पूंजी बाजार में सख्ती के कारण अफ्रीकी देशों के लिए उधारी महंगी हो गई है, ऐसे में यह ऋण मध्यम अवधि की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता लंदन में आयोजित Investor Day के दौरान किया गया। इससे लागोस स्थित संस्था को वित्तीय मजबूती मिलेगी, क्योंकि वर्तमान में कई अफ्रीकी देश उच्च ब्याज दर, कमजोर मुद्रा और सतर्क अंतरराष्ट्रीय निवेशकों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
पूर्व समझौते के बाद दूसरा बड़ा कदम
यह ऋण वर्ष 2021 में किए गए 100 मिलियन डॉलर के समान समझौते के बाद आया है। इसका उद्देश्य अफ्रीका में बुनियादी ढांचा वित्तपोषण की बड़ी कमी को दूर करना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अफ्रीका में सड़कों, बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों, रेल लाइनों, डिजिटल नेटवर्क और औद्योगिक इकाइयों की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध पूंजी उससे कम है। इस कारण भारत के लिए यहां निवेश और सहयोग के बड़े अवसर मौजूद हैं। AFC के कार्यकारी बोर्ड सदस्य और वित्तीय सेवाओं के प्रमुख बंजी फेहिनटोला ने कहा कि यह सुविधा भारत के साथ लंबे समय से चली आ रही साझेदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह अफ्रीका में आधारभूत ढांचा विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारतीय कंपनियों की बढ़ती भागीदारी
भारतीय कंपनियां पहले से ही अफ्रीका में दवा, कृषि, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, खनन और ऊर्जा क्षेत्रों में सक्रिय हैं। अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं तेज औद्योगिक विकास के लिए भारत को पूंजी और विशेषज्ञता के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देख रही हैं। African Development Bank के अनुमान के अनुसार, अफ्रीका को हर वर्ष आधारभूत ढांचा विकास के लिए 130 बिलियन से 170 बिलियन डॉलर तक की आवश्यकता होती है, जबकि हर साल लगभग 108 बिलियन डॉलर की वित्तीय कमी बनी रहती है।

