बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी रहेगी और वित्त वर्ष 27 में GDP growth 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। CareEdge Ratings की रिपोर्ट में बताया गया कि पश्चिम एशिया में तनाव से कुछ चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था का आधार लगातार मजबूत है और growth को support कर रहा है।
विश्लेषण में कहा गया कि पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत पर प्रभाव मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के रूप में महसूस किया जाएगा, जो मुद्रास्फीति, राजकोषीय संतुलन और बाह्य खातों को प्रभावित करता है।
बेस केस scenario में लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल की औसत कच्चे तेल की कीमतों को मानते हुए, विकास दर पहले के 7.2 प्रतिशत के अनुमानों से थोड़ी कम हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर नियंत्रण में रह सकती है और खुदरा महंगाई दर 4.5 प्रतिशत से 4.7 प्रतिशत के बीच में रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, CareEdge Ratings यह मानकर चला जा रहा है कि सरकार वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों का घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला प्रभाव सीमित रखेगी। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से समय के साथ महंगाई का दबाव कुछ हद तक बढ़ सकता है।
राजकोषीय मोर्चे पर, पेट्रोलियम उत्पादों पर संभावित उत्पाद शुल्क कटौती, अधिक सब्सिडी आवश्यकताओं और कर राजस्व में मामूली कमी के कारण सरकार को वित्तीय बोझ में मामूली वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रभाव का अनुमान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 0.5 प्रतिशत के आसपास है, जो भारत के सार्वजनिक वित्त के व्यापक संदर्भ में प्रबंधनीय है।
महंगाई और राजकोषीय गतिशीलता के कारण सरकारी बॉन्ड yield में भी मामूली वृद्धि होने की उम्मीद है।
बेस केस scenario में, वित्त वर्ष 2027 में सरकारी प्रतिभूतियों पर yield औसतन 6.8 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तेल आयात बिलों में वृद्धि, निर्यात और प्रेषण पर कुछ दबाव के साथ, चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 2.1 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रुपया प्रति डॉलर औसतन 92 और 93 के बीच रहने का अनुमान है|




