डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई दिशा
2026 BRICS Summit में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा को मल्टीपोलर डिजिटल इकोनॉमी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Modern Diplomacy में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, इस घोषणा में ऐसे डिजिटल मॉडल की परिकल्पना की गई है, जिसमें देश अपने Sovereign Digital Systems को नियंत्रित रखते हुए भी आपस में बेहतर Interoperability विकसित कर सकें।
DPI और AI पर BRICS का फोकस
घोषणा में Sovereign Digital Ecosystems, Interoperable Digital Public Infrastructure (DPI) और Artificial Intelligence (AI) को BRICS देशों के व्यापक विकास एजेंडे का हिस्सा बनाया गया है। इसमें BRICS DPI Repository और Pilot Projects पर चल रहे कार्यों का स्वागत किया गया है। साथ ही Digital BRICS Forum और Focus Group on Digital Public Infrastructure की भूमिका को भी मान्यता दी गई है।
भारत का Digital Public Infrastructure मॉडल
लेख के अनुसार, भारत का Digital Public Infrastructure मॉडल इस सोच का प्रमुख उदाहरण है। Aadhaar, Unified Payments Interface (UPI), DigiLocker और Consent-based Data Sharing Systems जैसे प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय नियंत्रण में रहते हुए सरकार और Private Sector को इनके ऊपर नई सेवाएं विकसित करने का अवसर देते हैं।
Global South के लिए नई संभावना
भारत ने Digital Public Infrastructure को वैश्विक स्तर पर पहली बड़ी पहचान 2023 G20 Presidency के दौरान दिलाई थी। अब BRICS के माध्यम से भारत के पास Global South के देशों के साथ डिजिटल सहयोग बढ़ाने का अवसर है। हालांकि BRICS देशों की राजनीतिक व्यवस्था, Currency, Technology Capability और वैश्विक संबंध अलग-अलग हैं, लेकिन Interoperability एक ऐसा रास्ता है जिसमें सभी देश अपनी स्वतंत्र डिजिटल व्यवस्था बनाए रखते हुए सहयोग कर सकते हैं।
Strategic Autonomy को मिलेगा समर्थन
लेख में कहा गया है कि यह डिजिटल ढांचा भारत की Strategic Autonomy की नीति के अनुरूप है। भारत एक ओर China के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को संतुलित करता है, वहीं United States के साथ Technology और Security Cooperation को भी मजबूत कर रहा है। Interoperable Digital Architecture भारत को अलग-अलग Technology Ecosystems के साथ काम करने और अपने महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद कर सकता है।
Emerging Economies के लिए बड़ा अवसर
Global South के कई देश भविष्य में Foreign Cloud Providers, Semiconductors, AI Models और Telecom Technologies पर निर्भर रहेंगे। ऐसे में एक देश American Cloud Services, Chinese Hardware, Japanese या Korean Industrial Systems, Indian DPI Model और European Regulatory Standards के साथ स्थानीय Applications को जोड़ सकता है। यही Multilateral Digital Economy का आधार बन सकता है, जहां सहयोग के साथ-साथ National Control भी कायम रहे।

