महंगाई के दबाव से RBI पर बढ़ा दबाव
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर शुरू कर सकता है। Systematix Group की एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती Consumer Price Index (CPI) Inflation और Wholesale Price Inflation (WPI) के बीच RBI अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव कर सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि Policy Repo Rate धीरे-धीरे बढ़कर 6.5 प्रतिशत के करीब पहुंच सकता है।
अक्टूबर MPC बैठक में मिल सकते हैं संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत में होने वाली Monetary Policy Committee (MPC) बैठक में RBI के रुख में बदलाव के शुरुआती संकेत दिखाई दे सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में RBI द्वारा Repo Rate को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखना बढ़ती महंगाई की स्थिति के अनुरूप नहीं दिख रहा है।
महंगाई 6 प्रतिशत पार जाने का अनुमान
Systematix Group ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अक्टूबर-नवंबर तक महंगाई 6 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। इसके पीछे बढ़ती Wholesale Price Inflation, El Nino के कारण Food Supply पर असर और लगातार ऊंची Crude Oil Prices को प्रमुख कारण बताया गया है।
CPI और Food Inflation में बढ़ोतरी
अगस्त में Consumer Price Index (CPI) Inflation बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई, जो नई Series में सबसे ऊंचा स्तर है। जुलाई में यह आंकड़ा 4.45 प्रतिशत था। Food Inflation भी बढ़कर 5.95 प्रतिशत हो गई, जबकि Rural Inflation 5.23 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्रों में Food Inflation 6.13 प्रतिशत तक पहुंच गई।
WPI Inflation और लागत दबाव बढ़ा
Wholesale Price Inflation अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत थी। Systematix Group के CEO एवं Co-Head, Institutional Equities Dhananjay Sinha ने कहा कि Food Prices अभी भी महंगाई का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। इसके अलावा Fuel और Energy Costs, West Asia से जुड़े वैश्विक घटनाक्रम और Manufacturing Costs भी महंगाई के दबाव को बढ़ा रहे हैं।
Core Inflation में भी तेजी
रिपोर्ट के अनुसार, CPI में Personal Care, Social Protection, Restaurants और Accommodation Services जैसे क्षेत्रों ने भी महंगाई बढ़ाने में योगदान दिया है। वहीं Core Inflation भी बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई है, जिससे RBI के सामने कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती और बढ़ गई है।

