विकासशील देशों की आवाज: भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता ने विकासशील देशों की चिंताओं को Global Governance के केंद्र में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने Global South के Development Agenda को आगे बढ़ाने के साथ Digital Public Infrastructure और Development Finance जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा किए हैं।
Digital Infrastructure पर जोर: पिछले एक दशक में भारत ने ऐसा Digital Ecosystem तैयार किया है, जिसके जरिए करोड़ों लोगों के लिए Payments, Banking और Public Services तक पहुंच आसान हुई है। Aadhaar, UPI और India Stack को बड़े स्तर पर अपनाए गए Digital Systems के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
UPI का बढ़ता दायरा: भारत का UPI अब केवल घरेलू Payment Infrastructure तक सीमित नहीं है। France, Sri Lanka, Mauritius और UAE जैसे देशों में UPI आधारित Payment Services की शुरुआत ने इसे Accessible और Interoperable Digital Payments के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना दिया है।
Development Finance की जरूरत: BRICS के माध्यम से भारत ने Development Finance के मुद्दे को भी प्रमुखता दी है। Global South के सामने केवल Investment की कमी नहीं है, बल्कि उचित लागत पर Finance हासिल करना और ऐसे Projects के लिए Funding जुटाना भी चुनौती है, जिनसे तत्काल Commercial Returns नहीं मिलते।
NDB की अहम भूमिका: 2015 में स्थापित New Development Bank यानी NDB को Infrastructure और Sustainable Development Projects के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण माना गया है। Shanghai स्थित इस Bank ने World Bank और अन्य Development Lenders के विकल्प के तौर पर अपनी भूमिका बनाई है।
MSME और रोजगार पर फोकस: भारत ने BRICS Financial Agenda में MSMEs, Investment Cooperation और Local-Currency Financing जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया है। आसान Finance से छोटे कारोबार, Entrepreneurship, Employment और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
व्यापक विकास एजेंडा: भारत की BRICS अध्यक्षता में Health, Agriculture, Sustainability और Innovation को भी प्रमुखता मिली है। ये क्षेत्र समाजों की Resilience से सीधे जुड़े हैं और Global South में व्यापक एवं समावेशी विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

