नई दिल्ली,
देश के प्रमुख महानगरों में भीड़ कम करने के उद्देश्य से विकसित किए गए वैकल्पिक हवाई अड्डों की संयुक्त वार्षिक यात्री संभालने की क्षमता वर्ष 2026 के अंत तक लगभग 4 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। यह जानकारी क्रिसिल रेटिंग्स की एक नई रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई महानगरीय क्षेत्र और गोवा जैसे क्षेत्रों में पुराने हवाई अड्डे अपनी अधिकतम डिजाइन क्षमता के करीब संचालन कर रहे हैं। ऐसे में बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को संभालने में वैकल्पिक हवाई अड्डे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अगले चार वित्तीय वर्षों में इन वैकल्पिक हवाई अड्डों के विस्तार से उनकी कुल क्षमता बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक 4.5 से 5 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है। वर्तमान में मौजूदा हवाई अड्डों पर भीड़ और सीमित स्थान के कारण विस्तार की संभावनाएं कम हैं, जिससे नए हवाई अड्डों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हवाई अड्डों पर भीड़ के कारण दबा हुआ मांग अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। साथ ही, बेहतर संपर्क सुविधाओं के कारण इन हवाई अड्डों का सेवा क्षेत्र भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे यात्री संख्या में इजाफा होगा।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि इन हवाई अड्डों पर समयबद्ध तरीके से संचालन बढ़ाना बेहद जरूरी होगा, ताकि वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक अंकित हाखू ने कहा कि महानगरों के वैकल्पिक हवाई अड्डे वित्त वर्ष 2030 तक कुल क्षेत्रीय यातायात का 20 से 25 प्रतिशत संभाल सकते हैं। उन्होंने बताया कि पहले नियंत्रण अवधि के दौरान विमानन और गैर-विमानन दोनों स्रोतों से राजस्व बढ़ाना इन नए हवाई अड्डों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 2017 के बाद मुंबई के पुराने हवाई अड्डे की वृद्धि क्षमता सीमाओं के कारण धीमी पड़ गई थी, क्योंकि वहां एयरलाइनों को अतिरिक्त व्यस्त समय स्लॉट उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसके विपरीत, दिल्ली का हवाई अड्डा उस अवधि में बढ़ता रहा, लेकिन यदि क्षेत्र में दूसरे हवाई अड्डे का विकास नहीं होता, तो मध्यम अवधि में वहां भी समान स्थिति बन सकती थी। अन्य महानगरों में स्थिति कुछ बेहतर है। बेंगलुरु और हैदराबाद के हवाई अड्डे पिछले वित्त वर्ष में अपनी डिजाइन क्षमता के लगभग 65 प्रतिशत पर संचालित हो रहे थे, जिससे वहां विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है।
आगे देखते हुए, देश में कुल हवाई यात्री यातायात इस वित्त वर्ष के लगभग 41.5 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक करीब 58 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह लगभग 8 से 9 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। इस वृद्धि के पीछे मजबूत आर्थिक गतिविधि, हवाई यात्रा की अप्रयुक्त मांग और प्रमुख हवाई अड्डों पर क्षमता संबंधी बाधाओं में कमी प्रमुख कारण होंगे। क्रिसिल रेटिंग्स की टीम लीडर गौरी गुप्ता ने कहा कि वैकल्पिक हवाई अड्डों के सामने कुछ जोखिम भी हैं, जिनमें यात्री संख्या का अनुमान से कम रहना और राजस्व वृद्धि में देरी शामिल है।

