Tuesday, March 10, 2026 |
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 645 करोड़ रुपये के दावे चुकाए

by Business Remedies
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IDFC First Bank takes action on fraud case at Chandigarh branch

नई दिल्ली,

निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ शाखा से जुड़े धोखाधड़ी प्रकरण में ग्राहकों को कुल 645 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। बैंक ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह राशि उसके प्रारंभिक अनुमान से लगभग 55 करोड़ रुपये अधिक है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान अब तक किसी नई अनियमितता का पता नहीं चला है। बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पहले इस मामले में मूल राशि का अनुमान लगभग 590 करोड़ रुपये लगाया गया था। बाद में प्राप्त दावों के आधार पर बैंक ने कुल 645 करोड़ रुपये की मूल राशि संबंधित ग्राहकों को लौटा दी। बैंक का कहना है कि ये सभी दावे उसी घटना से जुड़े हुए हैं और चंडीगढ़ की उसी शाखा से संबंधित हैं, कोई नया मामला सामने नहीं आया है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि सभी संबंधित खातों का मिलान और जांच प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पूरे देश में 25 February 2026 के बाद से इस मामले से जुड़ा कोई नया दावा प्राप्त नहीं हुआ है। बैंक ने कहा कि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित ग्राहकों को भुगतान किया गया है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और बैंक अपने बकाया की वसूली के लिए कानूनी कदम उठाता रहेगा।

वित्तीय स्थिति की बात करें तो बैंक का कुल जमा आधार स्थिर बना हुआ है। 28 February तक बैंक का कुल जमा 2,92,381 करोड़ रुपये रहा, जबकि December के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपये था। बैंक का कहना है कि यह घटना केवल चंडीगढ़ की एक शाखा तक सीमित है और इससे बैंक की समग्र गतिविधियों पर कोई व्यापक असर नहीं पड़ा है। बैंक ने ग्राहकों का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने इस स्थिति को समझदारी से लिया। चालू तिमाही के दौरान बैंक का औसत तरलता कवरेज अनुपात 114 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है, जिसे बैंक ने संतोषजनक बताया। बैंक को उम्मीद है कि आने वाले समय में जमा और ऋण वृद्धि का रुझान पहले की तरह बना रहेगा।

इससे पहले बैंक ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में लगभग 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी दी थी, जिसमें कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई थी। मामले की विस्तृत जांच के लिए एक स्वतंत्र लेखा एवं परामर्श संस्था को फोरेंसिक ऑडिट का दायित्व सौंपा गया है और अंतिम रिपोर्ट चार से पांच सप्ताह में आने की उम्मीद है। जांच पूरी होने तक बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। घटना के बाद हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कार्यों की सूची से हटा दिया है।



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