केंद्र सरकार ने देश के राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव को अधिक आधुनिक, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि उन्नत एआई तकनीक से लैस Network Survey Vehicles (NSVs) की देशव्यापी तैनाती शुरू कर दी गई है। यह पहल आंकड़ा-आधारित और सक्रिय रखरखाव व्यवस्था को मजबूत करेगी तथा राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन अत्याधुनिक सर्वेक्षण वाहनों में 3 डी लेजर तकनीक, जीपीएस प्रणाली, उच्च-गुणवत्ता कैमरे, लेजर प्रोफाइलर और उन्नत 3डी सेंसर लगाए गए हैं। इनकी सहायता से राजमार्गों की विस्तृत डिजिटल मैपिंग की जा सकेगी और सड़क की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन संभव होगा।
मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली सड़कों पर मौजूद गड्ढों, दरारों, मरम्मत किए गए हिस्सों तथा सतह की असमानताओं जैसी खामियों की पहचान करने में सक्षम है। इससे संबंधित एजेंसियां समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई कर सकेंगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सफर अनुभव मिलेगा और सड़क सुरक्षा भी मजबूत होगी। सरकार ने बताया कि इन NSVs को पहले ही कई राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों में तैनात किया जा चुका है। उम्मीद है कि इससे सड़क परिसंपत्तियों की निगरानी और रखरखाव की पूरी प्रक्रिया में व्यापक बदलाव आएगा। पारंपरिक सर्वेक्षण पद्धतियों के तहत प्रतिदिन केवल 20 से 80 किलोमीटर सड़क का सर्वेक्षण किया जा सकता था, जबकि नई पीढ़ी के ये वाहन प्रतिदिन 300 किलोमीटर तक का सर्वेक्षण करने में सक्षम हैं।
इस बढ़ी हुई क्षमता से सड़कों में उत्पन्न होने वाली खामियों का पता लगाने की प्रक्रिया तेज होगी और रखरखाव कार्य शुरू करने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि इससे राजमार्गों की गुणवत्ता बनाए रखने में उल्लेखनीय सुधार होगा। तकनीक के उपयोग से आंकड़ों के प्रसंस्करण और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गई है। सर्वेक्षण के दौरान एकत्र किए गए कच्चे आंकड़ों को सुरक्षित रूप से कूटबद्ध कर 48 घंटों के भीतर केंद्रीय NSV केंद्र को भेज दिया जाता है। इसके बाद देश के पांच क्षेत्रों में तैनात विशेषज्ञ टीमें इन आंकड़ों का विश्लेषण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करती हैं।
पहले जहां पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में 4 से 6 महीने तक का समय लग जाता था, वहीं अब यही कार्य केवल 10 दिनों में पूरा किया जा सकता है। रिपोर्ट की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक रिपोर्ट को कठोर गुणवत्ता जांच प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता है। रिपोर्ट के सत्यापन के बाद संबंधित पक्षों को डिजिटल माध्यमों के जरिए स्वतः सूचनाएं भेजी जाती हैं। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और संचार प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के AI-Based Data Lake Portal के साथ एकीकरण है। सभी सर्वेक्षण निष्कर्ष सीधे इस मंच पर अपलोड किए जाएंगे, जिससे विशेषज्ञ वास्तविक समय में सड़कों की स्थिति का विश्लेषण कर सकेंगे और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर रखरखाव तथा मरम्मत संबंधी निर्णय ले सकेंगे। सरकार का मानना है कि AI और 3 डी लेजर तकनीक का यह उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा। साथ ही, इससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और देशभर में यात्रियों को बेहतर एवं सुरक्षित यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।

