बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
Fortis Escort Hopital जयपुर ने आईएससीसीएम ((ISCCM) जयपुर द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय राज क्रिटिकॉन 2024 के भाग के रूप में 8 नवंबर को ‘पॉइंट ऑफ़ केयर अल्ट्रासाउंड (POCUS)’ प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. वैभव भार्गव और डॉ. किशोर मंगल, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञ ने बताया की कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा चिकित्सको को आपातकालीन और गहन चिकित्सा देखभाल में बेडसाइड रोगी की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण अल्ट्रासाउंड के कौशल को बढ़ाना था।
देश भर से आये विशेषज्ञों में एम्स नागपुर के डॉ. एनके जोशी, एम्स भटिंडा के डॉ. गोपाल जालवाल और एम्स जोधपुर के डॉ. अंकुर शर्मा तथा अन्य ने अल्ट्रासाउंड फिजिक्स, वेव डायनेमिक्स, फेफड़े के अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी इंटरप्रिटेशन, क्रिटिकल केयर इकोकार्डियोग्राफी और फास्ट तथा ई-फास्ट जैसे ट्रॉमा प्रोटोकॉल सहित प्रमुख विषयों पर अपने अनुभव साझा की। दिन भर चलने वाली इस कार्यशाला के दौरान, प्रतिभागियों ने अपने कार्यस्थलों पर सिनेरियो बेस्ड, हैंड्स ऑन ट्रेनिंग की और क्रिटिकल परिस्थितियों में रियल टाइम में निर्णय लेने के लिए अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग करने का प्रैक्टिकल अनुभव प्राप्त किया।
डॉ. वैभव भार्गव, वरिष्ठ क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर ने कहा कि ‘कार्यशाला का उद्देश्य जीवन-जोखिम वाली स्थितियों में डॉक्टरों को तत्काल, इन्फोर्मटिव निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाना है। एक केंद्रित अल्ट्रासाउंड परीक्षा हमें एक मरीज की हीमोडायनामिक स्थिति और फ्लूइड प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी देती है, जिसमे समय पर हस्तक्षेप और देरी से निदान के बीच का अंतर हो सकता है।
इन प्रशिक्षणों द्वारा हम स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को क्रिटिकल स्थिति में अधिक प्रतिक्रियाशील, सटीक देखभाल प्रदान करने में मदद कर रहे हैं।’
डॉ. किशोर मंगल, वरिष्ठ क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर ने कहा कि ‘अल्ट्रासाउंड फिजिक्स, सिद्धांतों और मशीन संचालन की ठोस समझ – जिसे अक्सर ‘नॉबोलॉजी’ कहा जाता है – नैदानिक अभ्यास में इस तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए आवश्यक है। इन मूल बातों में प्रशिक्षण हासिल करके, चिकित्स्क अल्ट्रासाउंड की पूरी क्लीनिकल क्षमता द्वारा तेज़ और अधिक सटीक आकलन कर सकते है। इस कार्यशाला का उद्देश्य इन मूल अवधारणाओं को स्पष्ट करना है, ताकि चिकित्सकों को उपकरण की क्षमताओं को अधिकतम करने और गंभीर रोगियों के लिए देखभाल के मानक को बढ़ाने में मदद मिल सके।’

