नई दिल्ली, से आई रिपोर्ट के अनुसार अरबपति उद्यमी एलॉन मस्क ने अमेरिकी नियामक यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के साथ अपने मामले को निपटाने के लिए 1.5मिलियन डॉलर (लगभग ₹.12.5करोड़) का भुगतान करने पर सहमति जताई है। यह मामला ट्विटर (अब एक्स के नाम से जाना जाता है) में उनकी हिस्सेदारी की जानकारी समय पर सार्वजनिक न करने से जुड़ा था।
नियामक संस्था के अनुसार यह समझौता अदालत की मंजूरी पर निर्भर है और यह राशि एलॉन मस्क रिवोकेबल ट्रस्ट द्वारा दी जाएगी, जिसे इस मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल किया गया था। एसईसी का आरोप था कि ट्रस्ट ने ट्विटर में 5प्रतिशत हिस्सेदारी पार करने के बाद समय पर अपनी लाभकारी स्वामित्व की जानकारी साझा नहीं की, जो 1934 के सिक्योरिटीज एक्सचेंज एक्ट के तहत अनिवार्य था।
हालांकि ट्रस्ट ने आरोपों को न स्वीकार किया है और न ही खारिज किया है, लेकिन उसने अंतिम निर्णय के लिए सहमति दी है जिसमें 1.5मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना और भविष्य में ऐसे नियमों के उल्लंघन से बचने के लिए स्थायी आदेश शामिल है। इस समझौते के तहत यदि अदालत इसे मंजूरी देती है तो एसईसी एलॉन मस्क को उनकी व्यक्तिगत क्षमता में इस मामले से अलग कर देगा, जिससे पूरा विवाद समाप्त हो जाएगा। इससे पहले एसईसी ने आरोप लगाया था कि जानकारी देने में देरी के कारण एलॉन मस्क को कम कीमत पर शेयर खरीदने का अवसर मिला, जिससे निवेशकों को 150मिलियन डॉलर (लगभग ₹.1250करोड़) से अधिक का नुकसान हुआ। हालांकि यह जुर्माना उस 200मिलियन डॉलर (करीब ₹.1660करोड़) से काफी कम है, जो नियामक ने शुरुआत में मांगा था।
एलॉन मस्क के वकील ने इस जुर्माने को “छोटी राशि” बताते हुए कहा कि यह मामला केवल एक फाइलिंग में देरी से जुड़ा था। यह मामला जनवरी 2025 में दायर किया गया था और यह निवेशकों द्वारा दायर किए गए एक अलग सामूहिक मुकदमे से भिन्न है। इसी बीच एलॉन मस्क का ओपनएआई और उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन के साथ कानूनी विवाद भी चर्चा में है। मस्क ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने अपने गैर-लाभकारी उद्देश्य से हटकर व्यावसायिक हितों की दिशा में काम किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से दो दिन पहले ओपनएआई के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन से समझौते की संभावना पर बातचीत की थी।

