श्री राम का जन्मोत्सव आज श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजनीय हैं, जो धर्म, कर्तव्य, त्याग, सत्य और करुणा के सर्वोच्च प्रतिमान हैं। वे आदर्श पुत्र, भाई, पति और शासक रामराज के प्रतीक हैं, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मर्यादा का पालन किया। आज के समय में श्रीराम के आदर्श वैयक्तिक ईमानदारी, सामाजिक समरसता, तनाव-प्रबंधन और नैतिक नेतृत्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। श्रीराम ने पिता की आज्ञा मानकर सहर्ष 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया, जो कर्तव्यपरायणता और रघुकुल रीति का पालन दिखाता है। व्यक्तिगत सुख-दु:ख से ऊपर उठकर धर्म और नैतिकता के मार्ग पर चलना, यहां तक कि न्याय के लिए सीता का त्याग करना। केवट, शबरी निचली जाति और विभीषण को अपनाकर उन्होंने ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाया। लक्ष्मण के प्रति अगाध प्रेम और सुग्रीव-विभीषण के संकट के समय अटूट साथ दिया। इस वर्ष रामनवमी पर रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं, जो पूजा के लिए अत्यंत शुभ हैं। त्रेतायुग में जब धरती पर रावण का अत्याचार बढ़ गया था, तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए चैत्र शुक्ल नवमी के दिन अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर में राम के रूप में अवतार लिया था। जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे। रामनवमी नैतिक मूल्यों और आदर्शों का पालन करने की प्रेरणा देती है। रामनवमी का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है, जब भगवान राम ने अयोध्या में जन्म लिया था। इस दिन लोग भगवान राम की पूजा करते हैं, रामायण का पाठ करते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं। वर्तमान समय में जब भ्रष्टाचार और स्वार्थ हावी है, श्रीराम का निष्पक्ष और न्यायपूर्ण आचरण लीडर्स के लिए एक आदर्श है। आज की युवा पीढ़ी जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता के कारण टूटते परिवारों से परेशान है, वहां राम का परिवार के प्रति समर्पण सामंजस्य सिखाता है। विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया, जो आज के तनावपूर्ण जीवन में मानसिक दृढ़ता का पाठ है। सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का आदर्श, जो आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक युग में ईमानदारी की नींव रख सकता है। वहीं शबरी के बेर खाना और जटायु के प्रति करुणा, प्राणी मात्र के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता को दर्शाती है।

