केंद्र सरकार अब मध्यम वर्ग को हरेक तरह से राहत देने की मूड में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जहां पहले केंद्र के बजट में मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में छूट देकर खुश कर चुकी है। वे बजट में घोषणा कर चुकी हैं कि सालाना 12 लाख रुपए तक कमाने वालों को इनकम टैक्स नहीं देना होगा। वहीं अब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट घटाने से मध्यम वर्ग को दोहरा लाभ दिया है। जहां गत दिवस हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की ५३ वीं बैठक में रेपो रेट घटाने से बैंक लोन सस्ते होने की पूरी उम्मीद है। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की है। करीब 5 साल बाद यह पहली बार है, जब इसमें कटौती की गई है। इस कटौती के बाद ब्याज दर अब घटकर 6.25 फीसदी रह गई है। इससे लोगों को लोन सस्ता मिलेगा। साथ ही ईएमआई का बोझ भी हल्का होगा। यानि कि जिन लोगों के बैंक से लोन चल रहे हैं, उनकी ईएमआई भी घटेगी। बैंक द्वारा कस्टमर को दिए लोन की ब्याज दरें २ तरह की होती हैं। एक फिक्स्ड और दूसरी फ्लोटर। जहां फिक्स्ड है तो रेपो रेट में बदलाव का कोई फर्क नहीं पड़ेगा और जिस ब्याज दर से लोन शुरू हुआ है, वही ईएमआई चलेगी। पर अगर लोन फ्लोटर ब्याज दर पर है, तो रेपो रेट में बदलाव का लोन की ब्याज दर पर फर्क पड़ता है, फ्लोटर ब्याज दर पर लोन लिया है तो ईएमआई भी घट जाएगी। पिछली बार मई, 2020 में रेपो रेट में 0.40 फीसदी की कमी की गई थी। हालांकि इसके बाद सरकार ने मई, 2022 में रेपो रेट को बढ़ाया था। आखिरी बार रेपो रेट में फरवरी 2023 में बदलाव किया गया था। उस समय इसमें बढ़ोतरी कर इसे 6.50 फीसदी किया गया था। तब से लेकर पिछली एमपीसी मीटिंग तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था। पिछली मीटिंग दिसंबर,2024 में हुई थी। माना यह जाता है कि जब अर्थव्यवस्था खराब दौर से गुजर रही होती है, तो मनी फ्लो बढ़ाकर इसकी रिकवरी करनी होती है। ऐसे में रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कमी करती है। ब्याज दरों में कमी होने से लोन सस्ता होता है और ईएमआई को बोझ हल्का होता है। वहीं जब महंगाई ज्यादा बढ़ती है, तो रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाकर मनी फ्लो को कम करता है। जहां पिछले वर्ष दिसंबर में रिटेल महंगाई दर और थोक महंगाई दर, दोनों में बदलाव हुआ है।

