Friday, July 3, 2026 |
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डिजिटलाइजेशन के बढ़ते खतरों के बीच सुरक्षा के उपाय होना भी जरूरी

by Business Remedies
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punit jain

विश्वभर में आजकल डिजिटलाइजेशन की काफी डिमांड है। पर इसके साथ ही खतरे भी लगातार बढ़ रहे हैं। जहां कोई नई चीज अच्छाई लाती है, तो वहीं बुराई भी साथ-साथ चलती है। लेकिन इसके समाधान यही है कि अच्छाई को अपना कर बुराई को दूर करने का प्रयास होता रहे। सुरक्षा के उपाय तलाशे जाएं और उनके बढ़ते खतरे को दूर करने का हल ढ़ूंढ़ा जाए। तभी सफलता हाथ लग सकती है। दुनिया डिजिटलीकरण के क्षेत्र में निरंतर आगे बढऩे से जहांं साइबर हमलों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। भारत में भी तेजी से डिजिटलाइजेशन होता जा रहा है या यूं कहे कि यहां की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह से डिजिटलाइजेशन हो गई है। हर काम कम्प्यूटर से होने लगे है। कोरोना महामारी के बाद से तो नौकरियां व पढ़ाई-लिखाई भी ऑनलाइन होने लगी है। स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, वित्त, खुदरा और कृषि आदि क्षेत्र ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आ गए हैं। लोगों के कामकाज और सेवाएं इसी के जरिए हो रहे हैं। डिजिटल प्रणालियां तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब तक साइबर सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डिजिटलाइजेशन के तहत होनी वाली सूचनाओं में लोगों के नाम, फोन नंबर, आधार नंबर, पासपोर्ट नंबर और पता जैसी व्यक्तिगत पहचान सब कुछ शामिल होती है। भारत में अपर्याप्त साइबर सुरक्षा, नीतियां और जागरूकता में कमी के कारण हैकर्स सिस्टम का लाभ उठाने में कामयाब हो रहे है। यही कारण है कि भारत को नियमित रूप से साइबर खतरों का सामना करना पड़ रहा है। जो लगातार रणनीतिकारों, आर्थिक विशेषज्ञों एवं राष्ट्रीय हित को निशाना बना रहे हैं। वहीं वित्तीय क्षेत्र को भी इन साइबर अपराधी साइबर खतरें उत्पन्न कर जोखिम पैदा कर रहे हैं। चोरी या जबरन वसूली से लाभ कमाने की चेष्टा रख रहे हैं। आज भारत जैसे विकासशील देश को इस ओर पहल कर व्यापक और कानून बनाने की आवश्यकता है, जो साइबर सुरक्षा के सभी पहलुओं जैसे साइबर आतंकवाद, साइबर युद्ध, साइबर जासूसी और साइबर धोखाधड़ी को दायरे में लाया जा सके। वैसे तो साइबर सुरक्षा को लेकर भारत में कई नीतियां अपनाई गई हैं, जैसे राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, साइबर सेल एवं साइबर अपराध जांच इकाईयां, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म और क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम। पर यह प्रयास अब भी अपर्याप्त और नाकाफी हैं, क्योंकि भारत को तकनीकी कर्मचारियों, साइबर फोरेंसिक सुविधाओं, साइबर सुरक्षा मानकों और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय की कमी का सामना करना पड़ रहा है।



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