दिल्ली की मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही रेखा गुप्ता के सामने जितनी बड़ी चुनौती इस जिम्मेदारी के निर्वहन की है, उसी के समांतर जनता की नजर उन वादों को पूरा किए जाने पर भी रहेगी, जो चुनावों के दौरान भाजपा की ओर से किए गए थे।
गौरतलब है कि दिल्ली चुनावों के दौरान यमुना का पानी और उसकी सफाई एक बहुप्रचारित मुद्दा बनी थी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच हकीकत यह है कि यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने और उसकी सफाई के मसले पर दशकों से राजनीति होती रही है। अमूमन हर पार्टी ने सत्ता मिलने पर यमुना को स्वच्छ बनाने के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन आज भी यह नदी बेहद दयनीय हालत में है और जिसका पानी नहाने लायक भी नहीं है।
यह देखने की जरूरत होगी कि दिल्ली की नई सरकार यमुना को एक स्वच्छ नदी के रूप में जीवन देने के लिए कितनी ईमानदार इच्छाशक्ति के साथ काम कर पाती है। इसके अलावा, पूर्व सरकार की ओर से जनता के लिए चलाए गए कल्याणकारी कार्यक्रम, स्कूली शिक्षा, भ्रष्टाचार पर रोक, आबकारी नीति, दिल्ली में भयावह स्तर तक के प्रदूषण और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने जैसी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं, जिन पर विपक्ष के रूप में कभी भाजपा सवाल उठाती थी और अब आम आदमी पार्टी अपनी मजबूत भूमिका में हमेशा तैयार दिखेगी।
दिल्ली में बिजली-पानी आदि सेवाओं के अलावा बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा, आयुष्मान भारत की सुविधा जैसी कई योजनाओं के अलावा उपराज्यपाल के साथ तालमेल के मामले में नई सरकार की नीतियों पर सबकी नजर रहेगी।
हालांकि यह चौथी बार है, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की कमान एक महिला को मिली है, लेकिन भाजपा ने इस बार खासी सीटें जीतने के बाद और इस पद के लिए कई दावेदारियों और जद्दोजहद की खबरों के बीच जिस तरह रेखा गुप्ता को यह जिम्मेदारी सौंपी है, यह अपने आप में एक अहम फैसला है। अब सत्ता संभालने के बाद भाजपा और नवनियुक्त मुख्यमंत्री के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी होगी कि आम आदमी पार्टी के शासन को उन्होंने जिन सवालों पर कठघरे में खड़ा किया था, जनता से जो वादे किए थे, उनको पूरा करने के प्रति वे कितनी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ काम कर पाती हैं।

