प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन आत्मनिर्भर भारत को लेकर अधिकांश राज्य पूरी तैयारी में जुट गए है। पिछले साल १७ दिसंबर को भारत के पीएम ने जयपुर में पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी परियोजना को लेकर राज्यों को सचेत किया था कि अगर राज्यों को आत्मनिर्भर बनना है तो इस परियोजना को क्रियान्वित करने की ओर बढ़े। गत दिनों ही राजस्थान के बजट में इस परियोजना को लेकर इसकी झलक देखने को मिली है। राजस्थान के गत दिनों पेश हुए बजट में वित्त मंत्री दिया कुमारी ने कहा भी है कि पूर्वी राजस्थान की राम जल सेतू लिंक परियोजना को गति देने के लिए 9 हजार 400 करोड़ रुपए के काम शुरू हो गए हैं। प्रोजेक्ट के तहत 12400 करोड़ के टेंडर हो चुके हैं। 12 हजार 807 करोड़ रुपए के काम की मंजूरी दी जा चुकी है। पिछले दिनों ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उदयपुर में हुए एक सम्मेलन में कहा था कि हमें जल संरक्षण के उपायों को अपनाकर जल आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। जिससे आने वाली पीढिय़ों को एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य प्रदान किया जा सके। उन्होंने कहा कि जल आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें एक सुव्यवस्थित रोडमैप की आवश्यकता है, जिसमें कृषि तथा शहरी जल प्रबंधन और तकनीकी नवाचार जैसे प्रमुख पहलुओं का समावेश हो। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में जल आत्मनिर्भरता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन के रूप में एक भागीरथी प्रयास किया है। मुख्यमंत्री शर्मा का कहना था कि राम जल सेतु लिंक परियोजना प्रदेश की जीवन रेखा है तथा इसके माध्यम से प्रदेश के 17 जिलों में 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और 3 करोड़ से अधिक आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। कर्मभूमि से मातृभूमि कार्यक्रम के माध्यम से प्रवासी राजस्थानी प्रदेश के 60 हजार गांवों में भूजल पुनर्भरण हेतु रिचार्ज वैल बनाने में योगदान दे रहे हैं। राज्य सरकार जल संरक्षण के लिए कम पानी में उगने वाली फसलों, शहरी जल प्रबंधन, सीवरेज के पानी के शुद्धिकरण एवं पुन: उपयोग के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, जल गुणवत्ता और स्रोतों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग सहित विभिन्न कदम उठा रही है और इस विजन को जल्द पूरा करने का प्रयास रहेगा।

