अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य पिछले दिनों अमेरिका के वाइट हाउस में हुई मुलाकात में कई मुद्दों पर तो चर्चा की गई, लेकिन अवैध प्रवासी भारतीयों को अमानवीय तरीके से वहां से भेजने को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई। इससे साफ जाहिर होता है कि भारत के प्रधानमंत्री इस मुद्दे को नजरदांज करते दिख रहे हैं। जबकि इस मुद्दे को भारत को अपना पक्ष रख अमेरिकी राष्ट्रपति से चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन इसका अब तक कोई हल नहीं निकल सका है। गत दिनों ही अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे कुल 116 भारतीयों को दूसरी बार में निर्वासित किया गया। वहीं निर्वासित लोगों को लेकर तीसरा विमान भी भारत पहुंचा, जिसमें 112 लोग सवार थे। इससे पहले 5 फरवरी को 104 निर्वासित लोगों को लेकर अमेरिका का पहला सैन्य विमान अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा था। इससे साफ जाहिर होता है कि यह क्रम लगातार बना रहेगा, जब तक की उनसे बातचीत नहीं होती है। भारतीय निर्वासित लोगों के साथ अमेरिकी अधिकारियों के अमानवीय व्यवहार पर विपक्ष के हंगामे और सरकार की सफाई के बावजूद एक महीने के भीतर ही निर्वासित लोगों की दूसरी खेप लाने वाले अमेरिकी सैन्य विमान में एक बार फिर इन लोगों के साथ हुए दुव्र्यवहार पर सवाल उठ रहे हैं। निर्वासित लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरने से मात्र 20 मिनट पहले ही उनकी हथकड़ी और जंजीरे खोलीं। जानकारी के अनुसार दूसरी उड़ान में कुल 116 भारतीयों को निर्वासित किया गया, जिनमें से 67 पंजाब से थे। इसके अलावा हरियाणा से 33, गुजरात से आठ, उत्तर प्रदेश से तीन, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान से दो-दो और हिमाचल प्रदेश और कश्मीर से एक-एक शामिल थे। गत दिवस उड़ान में सवार होशियारपुर जिले के कुराला कलां गांव के दलजीत सिंह ने बताया कि सैन डिएगो, कैलिफोर्निया से अमृतसर के बीच 66 घंटे की लंबी यात्रा के दौरान हमें हथकड़ी लगाई गई और बेडिय़ों में रखा गया था। निर्वासित लोगों में से सिख युवाओं को अमेरिकी सैन्य विमान में चढऩे से पहले उनकी पगड़ी उतारने के लिए मजबूर किया गया, जिस पर सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय को इस ओर अमेरिका के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत कर अमानवीय व्यवहार नहीं किए जाने के लिए चेताए जाना बेहद जरूरी है।

