Sunday, July 5, 2026 |
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भारतीय मौसम विभाग का सफर

by Business Remedies
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punit jain

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने 1875 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक काफी सफर तय कर लिया है। इसमें समय के साथ काफी सुधार हुआ है और अब यह देश की वैज्ञानिक उन्नति का प्रतीक है। यह अल्पावधि में और दीर्घावधि में मौसम के रुझानों की विशेषज्ञतापूर्वक जानकारी देता है और मौसम से जुड़ी विपरीत घटनाओं को लेकर समय रहते चेतावनी देता है। चूंकि भारत का मौसम विभाग हाल ही में 150 साल का हुआ है, इसकी महत्ता की अनदेखी नहीं की जा सकती है।
मौसम का पूर्वानुमान विभिन्न क्षेत्रों के रोजमर्रा के काम में अहम भूमिका निभाता है। इनमें खेती, सडक़ और रेल परिवहन, उड़ान संचालन, बिजली संयंत्रों से ऊर्जा उत्पादन का प्रबंधन और यहां तक कि पर्यटन भी शामिल हैं।

वर्षा, चक्रवात, लू की चपेट और सूखे का सही अनुमान भी भारत जैसे देशों में आपदा के बेहतर प्रबंधन को लेकर अहम है। पूर्वानुमान का सटीक होना समय के साथ बढ़ता गया। हालांकि अभी भी सुधार की गुंजाइश है। वर्ष 1999 में ओडिशा में ‘सुपर साइक्लोन’ के बाद आईएमडी ने लगातार यह प्रयास किया है कि चक्रवात का अनुमान लगाने की उसकी क्षमता में सुधार हो।

वास्तव में चक्रवात को लेकर पूर्वानुमान लगाने की क्षमता 2000 के दशक के आरंभ के 20 फीसदी से बढक़र 2020 में 80 फीसदी हो चुकी है। इसी प्रकार अतिरंजित मौसम की घटनाओं को लेकर चार-पांच दिन पहले अनुमान लगाने की क्षमता लोगों का जीवन बचाने में बहुत मददगार साबित हो रही है। इसका श्रेय आईएमडी द्वारा ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, ऑटोमेटिक रेन गेज इंस्ट्रूमेंट्स, डॉप्लर रडार और ऑब्जर्वेटरी जैसी उन्नत तकनीक अपनाने को भी दिया जा सकता है। स्पष्ट है कि आईएमडी का 150 वर्ष का होना भारत जैसे देश के लिए अहम है, क्योंकि वह मौसम और जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से तैयार रहना चाहता है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का पूर्वानुमान लगाना और चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इस संदर्भ में हाल ही में जारी आईएमडी विजन डॉक्यूमेंट 2047 आने वाले वर्षों में अहम खाका पेश करने वाला होगा।



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