Wednesday, July 1, 2026 |
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देश में स्मॉग का कहर, बरतें सावधानी

by Business Remedies
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punit jain

इन दिनों किसानों की ओर से पराली जलाने, वर्षा न होने के कारण तथा पहाड़ों में बर्फबारी से कई राज्यों में न्यूनतम तापमान में तेजी से गिरावट और स्मॉग का कहर बढ़ जाने से दिल्ली एन.सी.आर. सहित उत्तरी भारत के राज्यों में वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट आ गई है। जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगों की सांसें घुट रही हैं और दम निकल रहा है। एक ओर सर्दी तथा प्रदूषण बढऩे के कारण लोग बीमार हो रहे हैं, तो दूसरी ओर सडक़ दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं तथा रेल व हवाई यात्रा भी प्रभावित हो रही है। कई फ्लाइटें व रेलगाडिय़ां तय समय से या तो घंटों लेट चल रही हैं या रद्द किए जाने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। हवा में प्रदूषण का बेहद खतरनाक स्तर भले दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा रहा हो, यह समस्या यहां तक सीमित नहीं है। उत्तर भारत के बड़े इलाके में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। इसी सप्ताह दिल्ली के साथ-साथ लखनऊ और पटना को देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में माना गया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि न तो इस समस्या का स्वरूप अनजाना है, न इसके कारण अज्ञात हैं और न ही इससे बचाव के उपायों को लेकर किसी तरह की अनभिज्ञता है। हवा में प्रदूषण की कितनी मात्रा वाहनों के धुएं से आती है, कितनी इंडस्ट्री से निकलने वाले उत्सर्जन से, कितनी इस क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों से और कितनी आसपास के राज्यों में पराली जलाए जाने से इसे लेकर थोड़ा-बहुत अंतर भले ही अलग-अलग स्टडीज में देखा गया हो, इसमें कोई दो राय नहीं कि हवा की गुणवत्ता बिगाडऩे में इन सबका सम्मिलित योगदान है। लिहाजा, धीरे-धीरे इन कारकों को नियंत्रित करने वाले ठोस कदम अगर नहीं उठाए जा रहे तो इसके पीछे इच्छा शक्ति की कमी को ही जिम्मेदार मानना होगा। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि आम लोग भी इसे एक मौसमी समस्या मानकर चल रहे हैं। यही कारण है कि न तो यह चुनावी मुद्दा बन पाता है और न ही निर्वाचित प्रतिनिधि इसे गंभीरता से लेकर हल करने की जरूरत महसूस करते हैं। स्मॉग को लेकर ऐसी गंभीर स्थिति के बीच लोगों को कई सावधानियां बरतना आवश्यक है। इसके लिए मास्क लगाना, घर, गाड़ी या ऑफिस में खिड़कियां बंद रखना, घर या ऑफिस में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल, रोगों से बचने की क्षमता मजबूत रखने के लिए पौष्टिïक भोजन लेना, अधिक तरल पदार्थ, नींबू पानी, नारियल पानी, जूस आदि लेना, वाहन चलाते समय ‘फॉग लाइट्स’ आदि का इस्तेमाल करना जरूरी है।



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