Friday, March 6, 2026 |
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हमलों के तनाव से कच्चे तेल व व्यापार पर असर, भारत में बढ़ सकती है महंगाई

by Business Remedies
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पिछले दिनों से अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद तनाव से भारत को तेल आयात और व्यापार पर असर पडऩे के साथ ही महंगाई के बढऩे की प्रबल संभावनाएं हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढऩे और होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने का भारी जोखिम है। भारत अपनी जरूरत का 9० फीसदी तेल आयात करता है, जिससे पेट्रोल-डीजल और परिवहन महंगा हो जाएगा। महंगाई बढ़ेगी और देश का चालू खाता घाटा भी बढ़ सकता है। ऊर्जा की कीमतों और बासमती चावल जैसे प्रमुख निर्यातों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। क्रूड ऑयल की कीमतें बढऩे से भारत का आयात बिल बढ़ेगा। जहां भारत का बासमती चावल, दवाएं, और कपड़ा जैसे उत्पादों का निर्यात प्रभावित हो सकता है। वैश्विक तेल बाजारों में अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं, जो सीधे तौर पर भारत में तेल की कीमतों को बढ़ाएंगी। भारत अपनी 40-50 फीसदी तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से करता है। इस रास्ते के बंद होने से आपूर्ति पर गहरा संकट आ सकता है। भारत रूस, अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका से तेल के आयात में और तेजी ला सकता है ताकि सप्लाई चैन को बनाए रखा जा सके। जहां कच्चा तेल महंगा होने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम होगा और आयात बिल में $ १३-14 बिलियन की बढ़ोतरी हो सकती है। भारत अपनी एलपीजी और एलएनजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से मंगाता है, जो युद्ध से प्रभावित होगा। शिपिंग कंटेनरों और बीमा की लागत बढऩे से सामानों का आयात महंगा होगा। समुद्री रास्तों में व्यवधान के कारण विशेष रूप से अगर जहाज केप ऑफ गुड होप से होकर गुजरते हैं, तो निर्यात में 15-20 दिनों की देरी हो सकती है। फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायनों और ऑटो घटकों जैसे निर्यात-उन्मुख उद्योगों को शिपिंग में देरी और अधिक बीमा लागत के कारण नुकसान हो सकता है। ईंधन और आयातित सामान महंगे होने से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है। जहां एक तरफ भारत सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने के लिए प्रयासरत है।



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