Wednesday, June 17, 2026 |
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जन जागरूकता से ही हो सकेगी वायु प्रदूषण में कमी

by Business Remedies
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भारत में वायु प्रदूषण एक प्रमुख समस्या बनती जा रही है। दुनिया के 30 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 21 भारत में हैं। औद्योगिक अवशेष एवं उद्योगों तथा वाहनों से उठने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, थर्मल पावर पर निर्भरता, कूड़ा जलाना, ईंधन के लिए गोबर और लकड़ी का इस्तेमाल प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। प्रदूषण में 17 प्रतिशत योगदान पराली जलाने का है। जब तक आम नागरिक जागरूक नहीं होंगे, तब तक वायु प्रदूषण में कमी नहीं आ सकेगी। दिवाली पर भी तीन दिनों तक पटाखे चलते रहने के कारण इतने दिनों के बाद भी दिल्ली में प्रदूषण वैसा ही है। बड़ी संख्या में बच्चे खांसी तथा सांस की अन्य तकलीफों का शिकार हैं। नर्सरी में पढऩे वाले छोटे-छोटे बच्चे भी प्रदूषण से पीडि़त हैं। बच्चों में वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों का विकास कम होता है और उनमें अस्थमा के मामले भी अधिक देखे जाते हैं जो इस क्षेत्र में लगभग एक तिहाई तथा देश के अन्य हिस्सों में 5 या 10 प्रतिशत है। वैसे तो सरकार वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कई उपाय कर रही है, जिनमें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम, औद्योगिक उत्सर्जन मानक और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान जैसे कदम शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसके तहत प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए विभिन्न रणनीतियां अपनाई जा रही हैं। वहीं अप्रैल, 2020 से बीएस-ङ्कढ्ढ अनुरूप वाहनों को अनिवार्य कर दिया है, जिससे सडक़ पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण में कमी आई है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यह एक आपातकालीन उपाय योजना है, जिसे वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के आधार पर लागू किया जाता है और इसमें गैर-जरूरी निर्माण पर रोक जैसे कदम शामिल होते हैं। इसके अलावा उद्योगों के लिए उत्सर्जन मानकों में संशोधन किया गया है और कई प्रमुख उद्योगों में ऑनलाइन निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को लागू किया गया है और सडक़ों तथा निर्माण स्थलों से धूल को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। पर वर्तमान में इसके लिए महत्ती आवश्यकता जन जागरूकता और भागीदारी ही है, लोगों को साइकिल चलाने को बढ़ावा देने, कार पूलिंग और पेड़ लगाने जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।



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