छोटे सरकारी बैंकों के बढ़ते परिचालन खर्च और एनपीए के दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार बैंकिंग ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए इन बैंकों का विलय करने को लेकर अमली जामा पहनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने में जुटी हुई है। प्रस्ताव पर रिकॉर्ड ऑफ डिस्कशन लगभग तैयार किया जा चुका है और अब इसे कैबिनेट और प्रधानमंत्री कार्यालय की मंजूरी होना ही शेष है। मंजूरी मिलने पर यह अगले वर्ष तक विलय हो जाएगा। जहां पहले वर्ष, 2017 से 2020 के बीच सरकार ने 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनाए थे। अगर मौजूदा योजना सफल होती है, तो देश में एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक ही चार प्रमुख सरकारी बैंक बचेंगे। जहां एक तरफ छोटी बैंकों के विलय से ग्राहकों को लंबे समय में तेज लोन प्रोसेसिंग, बेहतर ऑनलाइन सेवाएं और बड़े नेटवर्क का लाभ मिलेगा। विलय से बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, जिससे ग्राहकों को अधिक पूंजी और बेहतर सेवा मिलेगी। विलय के बाद ग्राहकों को तेज और बेहतर डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं मिल सकेगी। ग्राहकों को बड़े बैंक के अधिक शाखाओं और एटीएम तक पहुंच मिलेगी, जिससे लेनदेन आसान होगा। पर शुरुआती दौर में पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड को अपडेट करने जैसी अस्थायी असुविधाएं हो सकती हैं। ग्राहकों को नए ब्रांच कोड,आईएफएससी कोड और नेटबैंकिंग आईडी जैसे बदलावों के लिए भी तैयार रहना होगा।

