Friday, December 5, 2025 |
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अमेरिका-चीन व्यापारिक तनाव से निपटने और शांति कायम करने पर सहमत

by Business Remedies
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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग दो घंटे से भी कम समय तक चली अल्पकालिक बैठक के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव से निपटने और शांति कायम करने पर सहमत हो गए। इसमें अमेरिका के लिए और खास तौर पर ट्रंप के लिए शायद ही फायदे की कोई बात थी। बल्कि इससे शी की वह बात सही साबित हो गई कि वह व्यापार के मामले में रत्ती भर समझौता नहीं करेंगे।
अपनी दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर लगाए प्रतिबंध और लाइसेंसिंग की जरूरतें खत्म करने के बदले चीन भारी-भरकम शुल्क टालने में कामयाब रहा है। इस तरह सबंधों में कुछ नया नहीं हुआ है बल्कि ठहराव भर आया है। यह बराबरी का लेनदेन भी नहीं है क्योंकि निर्यात प्रतिबंध तो तब लगाए गए थे, जब अमेरिका ने शुल्क बढ़ाए थे।
चीन ने अमेरिकी किसानों से 2.5 करोड़ टन सोयाबीन खरीदने पर भी सहमति जताई। परंतु यह मात्रा पिछले साल यानी ट्रंप के राष्ट्रपति बनने और कारोबारी जंग छेडऩे के पहले की गई खरीद से कम है। चीन इसके बदले अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात पर 100 फीसदी का दंडात्मक शुल्क नहीं देगा। नई शुल्क दर 47 फीसदी होगी जो अब भी बहुत अधिक है, लेकिन भारत पर लगे शुल्क से कम है। दूसरे शब्दों में कहें तो चीन ने ट्रंप के हाथों कुछ गंवाए बगैर अपने ऊपर लगा शुल्क आधा करवा लिया।
दुर्लभ धातुओं और चुंबकीय तत्वों के निर्यात पर प्रतिबंधों को रोका जाना दुनिया के कई देशों के लिए राहत की बात है। इनमें यूरोपीय संघ और भारत भी शामिल हैं जो दोनों महाशक्तियों की लड़ाई में फंस गए हैं। शी चिनफिंग ने नपे-तुले तरीके से जता दिया कि इन धातुओं के बगैर उच्च तकनीक पर आधारित कोई भी निर्माण नहीं हो सकता और दुनिया को अगर इनकी जरूरत है तो देशों के पास चीन के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।



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