सूखे मेवों का वैश्विक बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसका कारण स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, स्वस्थ और सुविधाजनक नाश्ते के प्रति बढ़ती प्राथमिकता तथा पौधे आधारित आहार पर बढ़ता ध्यान है। इसके अलावा अन्य कारक जैसे उच्च व्यय योग्य आय, शहरीकरण तथा कार्यात्मक खाद्य पदार्थों और आहार पूरकों में सूखे मेवों की लोकप्रियता इस वृद्धि में योगदान करती है। सूखे मेवों में बादाम, अखरोट, किशमिश और खजूर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर निर्जलित फल हैं, जो अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए दुनिया भर में पसंद किए जाते हैं। भारत अपनी विविध जलवायु और उपजाऊ भूमि के लिए जाना जाता है, उच्च गुणवत्ता वाले सूखे मेवों की एक विस्तृत श्रृंखला इसे घर भी कहा जाता है। कश्मीर में पाए जाने वाले पोषक तत्वों से भरपूर बादाम से लेकर महाराष्ट्र के स्वादिष्ट किशमिश तक, भारतीय सूखे मेवों की वैश्विक स्तर पर बहुत मांग है। जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार इन उत्पादों की मांग बढ़ा रहे हैं, सूखे मेवों का निर्यात व्यवसायों के लिए एक लाभदायक उद्यम बन रहा है। भारत से सूखे मेवों के निर्यात के लिए प्रमुख बाजार संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, बांग्लादेश, सऊदी अरब, वियतनाम और मलेशिया हैं। पर पिछले कुछ महीनों से सूखे मेवों में आ रही तेजी यह दर्शा रही है कि कहीं यह मध्यम वर्गीय लोगों की पहुंच से बाहर ना हो जाएं। दिनों दिन इनकी कीमतों में इजाफा होता जा रहा है। भारत के सूखे मेवे के बाजार में कई तत्व बाधक बने हुए हैं। उनमें कच्चे माल की कीमत में अस्थिरता है। मौसम की स्थिति, फसल की विफलता और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसे कारकों के कारण ताजे फलों जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सूखे फलों की लागत और उपलब्धता को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा व्यापारियों को गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंता भी सता रही है। गुणवत्ता नियंत्रण में कोई भी चूक स्वास्थ्य जोखिम, उपभोक्ता अविश्वास और ब्रांड प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे बाजार के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए अभी से खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग को सचेत रहते हुए इन बाधक तत्वों को खत्म करने का प्रयास करते रहना चाहिए, जिससे की सूखे मेवे आम लोगों की पहुंच तक बने रहें।

