पिछले काफी समय से जीएसटी के रजिस्टे्रशन और रिफंड की जटिलता को लेकर उद्यमी और निर्यातक काफी परेशानी झेल रहे हैं। इसे लेकर सरकार ने जल्द ही राहत देने का मानस बनाया है। अगले कुछ दिनों में जीएसटी काउंसिल बैठक में ऑटोमैटिक जीएसटी रजिस्ट्रेशन, तेजी से रिफंड और इंटरमीडियरी सर्विसेज पर 18 फीसदी जीएसटी से राहत देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। सरकार की मनसा है कि अब उद्यमियों को सिर्फ 3 दिनों में ऑटोमैटिक जीएसटी रजिस्ट्रेशन देने की प्लानिंग कर रही है। यह सुविधा उन्हीं उद्यमियों को मिल सकेगी, जिनकी महीने का इनवॉइस जेनरेशन 3 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक है। वहीं सरकार रजिस्ट्रेशन की ही तरह जीएसटी रिफंड को भी पूरी तरह ऑटोमेटेड करने की योजना बना रही है। इससे निर्यात से जुड़े कारोबारियों को समय पर टैक्स रिफंड मिल सकेगा। इसके अलावा निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ब्रोकर, एजेंट्स और बिडिंग पोर्टल्स जैसी इंटरमीडियरी सेवाओं को निर्यात का दर्जा देकर उन पर लागू 18 फीसदी जीएसटी को हटाने पर विचार कर रही है। गत दिनों ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीबीआईसी के प्रधान मुख्य आयुक्तों, मुख्य आयुक्तों और क्षेत्रीय महानिदेशकों के हुए सम्मेलन में संकेत दे दिए थे कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड से प्रौद्योगिकी एवं जोखिम-आधारित मापदंडों का उपयोग कर करदाताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण को आसान, निर्बाध और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय इकाइयों को जीएसटी पंजीकरण, रिफंड की प्रक्रिया और करदाताओं की शिकायतों से निपटने जैसे विभिन्न मापदंडों में सुधार के लिए एक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए थे। उन्होंने उसी समय सीजीएसटी संरचनाओं को जीएसटी पंजीकरण के लिए जरूरी अनिवार्य दस्तावेजीकरण के बारे में करदाताओं, व्यापार संगठनों और उद्योग निकायों के बीच लक्षित जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिए थे। इससे पंजीकरण में अस्वीकृति एवं देरी को कम करने और आवेदनों के तेजी से प्रसंस्करण को सक्षम बनाने में मदद मिल सकेगी।

