आत्मनिर्भर भारत का विजन निरंतर आगे कदम बढ़ा रहा है। गत दिवस ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और सेमीकंडक्टर यूनिट को मंजूरी दी है, जो हम सभी भारतवासियों के लिए गौरव की बात है। इससे भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को और गति मिलेगी। देश की छठी सेमीकंडक्टर यूनिट उत्तर प्रदेश के जेवर में लगेगी। यह एचसीएल और फॉक्सकॉन का जॉइंट वेंचर है। एचसीएल का हार्डवेयर बनाने और विकसित करने का लंबा अनुभव है, जबकि फॉक्सकॉन इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली एक बड़ी कंपनी है। ये दोनों मिलकर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में जेवर हवाई अड्डे के पास एक प्लांट लगाएंगी, जिसकी लागत 3,706 करोड़ रुपए होगी। जहां पहले से ही पांच सेमीकंडक्टर यूनिट बनाने का काम भारत में तेजी से चल रहा है। यह यूनिट गुजरात व महाराष्ट्र में निर्माणाधीन है। जहां पाकिस्तान में आंतकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए हाल में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल हुआ। इस प्लांट में मोबाइल फोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, पीसी और अन्य कई उपकरणों के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स बनाए जाएंगे। ये चिप्स स्क्रीन को चलाने के लिए जरूरी होते हैं। इस प्लांट में हर महीने 20,000 वेफर्स बनाने की क्षमता होगी। वेफर एक तरह का पतला डिस्क होता है जिस पर चिप्स बनाए जाते हैं। इस प्लांट से हर महीने 36 मिलियन यूनिट चिप्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है। एक ओर यहां प्लांट लगने से भारत आत्मनिर्भर बनेगा, दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा। वहीं दूसरी ओर 2000 लोगों को रोजगार मिल सकेगा। सेमीकंडक्टर उद्योग अब पूरे देश में निरंतर आगे बढ़ रहा है। यहां तक की कई राज्यों में विश्व स्तरीय डिजाइन सुविधाएं शुरू हो गई हैं। राज्य सरकारें भी डिजाइन फर्मों को बढ़ावा देकर शैक्षणिक संस्थानों में अपना रही हैं। 270 शैक्षणिक संस्थानों और 70 स्टार्टअप में छात्र और उद्यमी नई तकनीक से नए उत्पाद बनाने में लगे हुए हैं। लैपटॉप, मोबाइल फोन, सर्वर, मेडिकल डिवाइस, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण में तेजी से वृद्धि के साथ सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ रही है। सरकार भारत को सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन का हब बनाना चाहती है। इसके लिए कंपनियों को बहुत अच्छा इंसेंटिव दिया जा रहा है। भविष्य में भारत में इसका बाजार 110 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

