प्रयागराज में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अब तक 2,200 तकनीक विभिन्न उद्योगों को हस्तांतरित कर चुका है। यह कदम देश में रक्षा उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
तीन दिवसीय ‘North Tech Symposium’ के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच अनुसंधान पर निरंतर ध्यान देना और आश्चर्यजनक क्षमता विकसित करना बेहद जरूरी है। यह कार्यक्रम भारतीय सेना के उत्तरी और मध्य कमान तथा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स द्वारा आयोजित किया गया। रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25प्रतिशत हिस्सा उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए निर्धारित किया गया है। अब तक ये संस्थाएं Rs.4,500करोड़ से अधिक राशि का उपयोग कर चुकी हैं, जिससे नवाचार और नई तकनीकों को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में केवल तीन से चार वर्षों के भीतर युद्ध की प्रकृति टैंकों और मिसाइलों से बदलकर ड्रोन और सेंसर आधारित हो गई है। इसके अलावा, रोजमर्रा की वस्तुएं भी अब घातक हथियारों में बदल रही हैं, जैसे लेबनान और सीरिया में पेजर हमलों ने दिखाया। ऐसी परिस्थितियों में भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि देश को ऐसी क्षमता विकसित करनी चाहिए जिससे आवश्यकता पड़ने पर दुश्मनों पर अप्रत्याशित हमला किया जा सके। इसके लिए सरकार ने नई Transfer Of Technology नीति लागू की है, जिसमें पहले लगने वाला 20प्रतिशत शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि DRDO ने भारतीय उद्योगों को अपने पेटेंट नि:शुल्क उपलब्ध कराने की नीति शुरू की है, जिससे उनकी तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी। साथ ही, DRDO की परीक्षण सुविधाएं भी उद्योगों के लिए भुगतान के आधार पर खोली गई हैं, जिनका हर साल सैकड़ों उद्योग उपयोग कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार उद्योगों को Directed Energy Weapons, Hypersonic Weapons, Underwater Domain Awareness, Space Situational Awareness, Quantum Technologies, Artificial Intelligence और Machine Learning जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए पूरा सहयोग देगी।
उन्होंने Operation Sindoor का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तकनीकी युद्ध और देश की तैयारियों का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें स्वदेशी उन्नत उपकरण जैसे आकाशतीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस का उपयोग किया गया। सरकार के आत्मनिर्भरता प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन Rs.1.54लाखकरोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात Rs.38,424करोड़ के ऐतिहासिक स्तर को छू चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पहलें जैसे Innovations For Defence Excellence (IDEX), ADITI और Technology Development Fund (TDF) नवाचार को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस कार्यक्रम में सेंट्रल कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और नॉर्दर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए।




