Saturday, July 4, 2026 |
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राजस्थान का पहला ‘साइबर सपोर्ट सेंटर’ लॉन्च

साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने और ऑनलाइन खतरों से निपटने की दिशा में सशक्त माध्यम बनेगा सेंटर

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने और ऑनलाइन खतरों की बढ़ती चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक सशक्त कदम उठाते हुए महानिदेशक पुलिस यू. आर. साहू एवं महानिदेशक एससीआरबी व साइबर क्राइम हेमंत प्रियदर्शी द्वारा जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में राजस्थान का पहला ‘साइबर सपोर्ट सेंटर” औपचारिक रूप से प्रारंभ किया गया। यह सेंटर मुंबई स्थित एनजीओ रिस्पॉन्सिबल नेटिजन्स द्वारा संचालित किया जाएगा तथा कोगटा फाउंडेशन इसमें आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा।
साहू और प्रियदर्शी ने केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने और ऑनलाइन खतरों से निपटने की दिशा में यह सेंटर एक सशक्त माध्यम बनेगा। यह अग्रणी केंद्र ऑनलाइन उत्पीडऩ से मुकाबला करने, साइबर अपराधों के पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने और प्तसाइबरसेफजयपुर अभियान के अंतर्गत साइबर वेलनेस को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। सेंटर का उद्देश्य डिजिटल उत्पीडऩ से उत्पन्न दीर्घकालिक मानसिक और भावनात्मक प्रभावों से निपटना है।
आरंभ में अतिथियों ने केंद्र का औपचारिक उद्घाटन कर इसमें दी जाने वाली सेवाओं की जानकारी ली। इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ, एडिशनल पुलिस कमिश्नर कुंवर राष्ट्रदीप, एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. रामेश्वर सिंह, डीसीपी ईस्ट तेजस्विनी गौतम सहित कमिश्नरेट के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सभी आयु वर्ग के नेटिजन्स के लिए बनेगा मददगार: पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ ने बताया कि यह सेंटर सभी आयु वर्ग के नेटिजन्स के लिए खुला रहेगा और यह कानून प्रवर्तन एवं डिजिटल सिस्टम में विश्वास को मजबूत करते हुए पीडि़तों को न्याय और पुनर्वास की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साइबर सपोर्ट सेंटर से संपर्क करने के लिए 87648-66039 और 87648-66040 पर कॉल किया जा सकता है।
जोसेफ ने बताया कि आंकड़े बताते हैं कि तीन में से एक बच्चा ऑनलाइन बुलिंग का शिकार होता है। 70त्न बच्चों और 30त्न महिलाओं ने साइबर अपराधों का सामना किया है। वित्तीय साइबर अपराधों में 24.5त्न की वृद्धि हुई है, जिससे 2024 में रु. 2054 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
राजस्थान में हर साल लगभग 3,000 साइबर अपराध के मामले दर्ज होते हैं। इनमें 47.25त्न वित्तीय अपराध, 30.16त्न यूपीआई घोटाले, 12त्न सोशल मीडिया और 11त्न यौन उत्पीडऩ से संबंधित होते हैं। पिछले तीन वर्षों में साइबर धोखाधड़ी के कारण पीडि़तों ने 1581 करोड़ गंवाए, जिनमें से पुलिस ने रु. 676 करोड़ होल्ड कराए। हर दिन 10-15 कॉल साइबर स्टॉकिंग, साइबर बुलिंग और उत्पीडऩ से जुड़ी समस्याओं को रिपोर्ट करती हैं।
जयपुर में स्थापित साइबर सपोर्ट सेंटर का उद्देश्य मुफ्त मनोवैज्ञानिक, कानूनी और तकनीकी सहायता प्रदान करना, शिक्षा, प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देना, साइबर अपराधों के मानसिक प्रभाव से पीड़ित व्यक्तियों को परामर्श देना और स्कूलों, कॉलेजों तथा सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा को मजबूत करना है।
यह केंद्र रिस्पॉन्सिबल नेटिजन्स के तहत संचालित होगा। इस टीम में परियोजना समन्वयक, वरिष्ठ परामर्शदाता और मनोवैज्ञानिक, कानूनी व साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, प्रशिक्षित प्रशिक्षक, कार्यशाला संचालक एवं केस डॉक्यूमेंटेशन के लिए फ्रंट डेस्क अधिकारी शामिल होंगे।



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