अमूमन हर वर्ष मार्च का महीना ठंडी हवा और समशीतोष्ण सुखद अहसास कराता था, लेकिन इस वर्ष मार्च महीने में ही भारत में मौसम के बदलते पैटर्न से हर कोई चिंतित है। पर्यावरण के खिलवाड़ से जहां खासकर गर्मी का मौसम अब पहले से ज्यादा जल्दी शुरू होता दिखाई दे रहा है। मार्च का महीना आमतौर पर हल्की गर्मी का होता है, लेकिन इस साल देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। मार्च महीने के पहले सप्ताह से ही असामान्य रूप से भीषण गर्मी पड़ रही है, जिसका मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की कमी, नमी की कमी और शुष्क हवाएं हैं, जिससे तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी, मार्च-मई के दौरान हीटवेव (लू) के साथ तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य, कृषि, पानी की कमी और बिजली की भारी मांग जैसे गंभीर नुकसान हो सकते हैं। इस साल सर्दियों के अंत में बारिश लाने वाले पश्चिमी विक्षोभ नहीं आए, जिससे मैदानी इलाके तेज धूप और शुष्क हवाओं के संपर्क में हैं। बादलों के अभाव के कारण धूप सीधे जमीन पर पड़ रही है, जिससे सतह तेजी से गर्म हो रही है। मार्च की शुरुआत में ही उत्तर और मध्य भारत में लू जैसी स्थिति बन गई है। वहीं मौसम वैज्ञानियों का भी कहना है कि ला नीना की कमजोर स्थिति के कारण भी तापमान में वृद्धि हो रही है। भीषण लू के कारण हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं आ रही हैं। घर-घर लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। वहीं जल्द गर्मी आने से रबी की फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे पैदावार कम होने की संभावना है। तेजी से वाष्पीकरण के कारण जलाशयों और भूजल स्तर में कमी आ सकती है, जिससे आने वाले समय में जल संकट बढ़ सकता है। एयर कंडीशनिंग की मांग बढऩे से बिजली की खपत बढ़ेगी, जिससे ग्रिड पर भारी दबाव आ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सूखे की स्थिति से जंगल में आग लगने का खतरा बढऩे की संभावना है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने, ज्यादा पानी पीने और तेज धूप में निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है।

