Monday, July 13, 2026 |
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केंद्र सरकार ने डीजल और एटीएफ निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया, घरेलू ईंधन दरों में कोई बदलाव नहीं

by Business Remedies
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Indian Government Increases Windfall Tax On Diesel And ATF Exports While Keeping Petrol Duty Unchanged

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नई दरें मंगलवार से प्रभावी हो गई हैं। सरकार का यह फैसला वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच घरेलू ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) को बढ़ाकर ₹.14 प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले यह ₹.13.5 प्रति लीटर था। इसी तरह, विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क में अधिक बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹.9.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹.12.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।

वहीं, पेट्रोल निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यथावत रखा गया है। यह पहले की तरह ₹.1.5 प्रति लीटर बना रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले जून की शुरुआत से लागू पखवाड़े के लिए सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ निर्यात शुल्क में संशोधन किया था। उस समय पेट्रोल पर ₹.1.5 प्रति लीटर, डीजल पर ₹.13.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹.9.5 प्रति लीटर शुल्क निर्धारित किया गया था।

मार्च महीने में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले तथा उसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने डीजल और एटीएफ निर्यात पर शुल्क लागू किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और अत्यधिक वैश्विक कीमतों के दौरान निर्यात को नियंत्रित करना है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होती है, तब निर्यात अधिक लाभकारी हो जाता है, जिससे घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।

अप्रैल में भी केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों, विशेषकर उच्च गति डीजल पर उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी की थी। उस दौरान डीजल निर्यात शुल्क को ₹.21.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹.55.5 प्रति लीटर कर दिया गया था, यानी इसमें ₹.34 प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने वित्त अधिनियम, 2018 के प्रावधानों के तहत डीजल पर सड़क और अवसंरचना उपकर को बढ़ाकर ₹.36 प्रति लीटर कर दिया था। सरकार का मानना है कि इस प्रकार के कदमों से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सकेगी।



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