बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। जहां एक ओर दुनिया की अधिकतर ऑटो कंपनियां तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रही हैं, वहीं जर्मन स्पोर्ट्स कार निर्माता पोर्श ने एक अलग और संतुलित रुख अपनाया है। पोर्श ने पुष्टि की है कि उसकी फ्लैगशिप SUV Cayenne का पेट्रोल (ICE) वर्जन अभी लंबे समय तक बाजार में मौजूद रहेगा — यह फैसला ऑटो इंडस्ट्री के कई जानकारों के अनुमान से बिल्कुल उलट है।
इलेक्ट्रिक की दौड़ में क्यों बनी रहेगी पेट्रोल Cayenne?
इसका जवाब है वैश्विक मांग में विविधता और पोर्श की मॉड्यूलर रणनीति।
जहां यूरोप जैसे क्षेत्रों में ईवी (EV) को लेकर सख्त नीतियां आ रही हैं, वहीं मिडल ईस्ट, चीन और अमेरिका के कुछ हिस्सों में आज भी हाई-परफॉर्मेंस पेट्रोल SUV की जबरदस्त मांग बनी हुई है।
पोर्श के Cayenne प्रोडक्ट लाइन के प्रमुख माइकल शैट्जले ने पुष्टि की कि 2023 में फेसलिफ्ट के बाद भी मौजूदा Cayenne का उत्पादन जारी रहेगा और भविष्य में इसे अपडेट भी किया जाएगा। इसमें प्लग-इन हाइब्रिड वेरिएंट्स भी शामिल होंगे जो धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक ट्रांजिशन की दिशा में एक कदम हैं। साथ ही परफॉर्मेंस-फोक्स्ड ICE वर्जन भी बनाए जा सकते हैं ताकि पारंपरिक ग्राहकों की मांग पूरी की जा सके।
“हम केवल आज के बाजार के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक लचीलापन ध्यान में रखकर कारें बना रहे हैं,” – माइकल शैट्जले
दोहरी रणनीति – EV और ICE साथ-साथ पोर्श की यह दोहरी रणनीति सुनिश्चित करती है कि वह उन देशों के ग्राहकों को भी खो न दे जहां EV इन्फ्रास्ट्रक्चर अब भी विकासशील है। इलेक्ट्रिक Cayenne, जो Audi के साथ विकसित PPE आर्किटेक्चर पर आधारित होगी, पेट्रोल वर्जन के साथ कुछ वर्षों तक समानांतर रूप से बिकेगी। इसका मतलब है कि फिलहाल पेट्रोल मॉडल का कोई तात्कालिक अंत नहीं होगा – जो कि आज के EV-केंद्रित माहौल में एक दुर्लभ सोच है।
भारत और एशिया के लिए क्या मायने हैं?
भारत जैसे बाजारों के लिए, जहां EV चार्जिंग ढांचा अभी भी सीमित है, यह खबर सकारात्मक और भरोसेमंद है। भारत में पोर्श की बिक्री बढ़ रही है और लक्ज़री कार खरीदार अभी भी लंबी दूरी, तेज़ रिफ्यूलिंग और हाई परफॉर्मेंस के लिए पेट्रोल वाहनों को पसंद करते हैं – जो Cayenne की मुख्य खूबियाँ हैं।
भविष्य की दिशा
हालांकि पोर्श अपने 2030 तक 80% वैश्विक बिक्री को इलेक्ट्रिक बनाने के लक्ष्य पर कायम है, लेकिन Cayenne ICE की बढ़ी हुई उम्र इस बात को दर्शाती है कि कंपनी व्यावहारिक और बाजार-संवेदनशील दृष्टिकोण अपना रही है। यह भी दर्शाता है कि “ग्रीन क्रांति” के दौर में भी परफॉर्मेंस और इंजीनियरिंग विरासत की अहमियत बनी रहेगी।

