Wednesday, July 15, 2026 |
Home InternationalBoycott Turkey और Boycott Azerbaijan

Boycott Turkey और Boycott Azerbaijan

मार्बल व निर्माण उद्योग पर नहीं पड़ेगा विपरित प्रभाव

by Business Remedies
0 comments

बिजनेस रेमेडीज | जयपुर।कुंजेश कुमार पतसारिया |  बाईस अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक तनाव बढ़ा, तो तुर्की-अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया और भारत के खिलाफ इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को ड्रोन्स-हथियार और इन्हें चलाने वाले ट्रेंड लोग भी भेजे। इसके बाद देशभर में बॉयकॉट तुर्की और बॉयकॉट अजरबैजान शुरू हो गया है।

भारत ने तुर्की और अजरबैजान के संगमरमर, मार्बल और अन्य सामानों का बहिष्कार शुरू कर दिया, क्योंकि इन देशों ने पाकिस्तान को समर्थन दिया था। कई व्यापारी संगठनों ने इस बहिष्कार का आह्वान भी किया। वहीं सोलह मई को कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने तुर्की और अजरबैजान के साथ व्यापार खत्म करने की घोषणा की। पिछले दिनों ही दिल्ली में हुई बैठक में देश के 24 राज्यों से व्यवसायिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया था। सभी ने एक स्वर में कहा है कि जो देश भारत के खिलाफ है, उसके साथ व्यापार करने का कोई सवाल ही नहीं है। यह उनके राष्ट्र प्रेम की भावना को उजागर करता है। वहीं व्यवसाईयों का यह भी कहना है कि भारत के कई राज्यों में खनिज के भंडार है। इसके अलावा इंपोटेट मैटेरियल इटली, ग्रीस, स्पेन और वियतनाम से मंगाकर इसकी पूर्ति की जा सकती है। तुर्की के मार्बल की उपलब्धता ना होने से मार्बल व निर्माण उद्योग पर कोई भी विपरित प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी संबंध को लेकर मार्बल व्यवसाय से जुड़े संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

मार्बल आयात पर लगे पूर्ण प्रतिबंध
तुर्की से मार्बल आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। हम सभी को पता है कि तुर्की ने आंतकवाद का साथ दिया है। देश और उसकी सुरक्षा प्रथम है, चूंकि मार्बल खनिज हमारे देश में सम्पूर्ण मात्रा में उपलब्ध है। केवल मात्र तुर्की से आयातित मार्बल की उपलब्धता ना होने से मार्बल व निर्माण उद्योग पर कोई भी विपरित प्रभाव नहीं पड़ेगा।
-राघव धूत, निदेशक, धूत संगमरमर, जयपुर

 

 

इम्पोटेट मैटेरियल के लिए भी कई विकल्प
तुर्की के मार्बल का बहिष्कार सबसे पहले उदयपुर मार्बल प्रोसेसिंग समिति ने ही किया था। उसके बाद अन्य एसोसिएशन आगे आई। तुर्की हमेशा से पाकिस्तान को समर्थन करता आया है। ऑपरेशन सिंदूर में तो उसने खुले रूप से समर्थन देते हुए उसे हथियारों की भी आपूर्ति की। ऐसे में उसके साथ लंबे समय तक बहिष्कार होना जरूरी है। उसके माल को ना मंगाकर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा,क्योंकि भारत के राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में खनिज के काफी भंडार हैं, वहां से माल मंगाकर आपूर्ति की जा सकती है। इसके अलावा इम्पोटेट मैटरियल के लिए भी कई विकल्प है, तुर्की से मार्बल ना मंगाकर इटली, ग्रीस, स्पेन और वियतनाम से मंगा सकते हैं। इसका तुर्की के माल का बहिष्कार सभी भारतीय व्यापारिक को पूरजोर तरीके से करना चाहिए।
-हितेश पटेल, निदेशक,तिरुपति बालाजी मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री बनारसी मार्बल स्टोन प्राइवेट लिमिटेड, उदयपुर

तुर्की फेयर का भी करते हैं विरोध
तुर्की मार्बल के आयात का हम पूरजोर से बहिष्कार करते हैं। यह बॉयकॉट लंबे समय तक चलना चाहिए, ताकि उसे समझ आ जाए कि भारत उनके आयात पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा वहां लगने वाले फेयर में हमारे यहां से कोई व्यापारी नहीं जाएगा, इसका हम विरोध करते हैं। राजस्थान में भी काफी खनिज भंडार है, वहां से इसकी आपूर्ति की जा सकती है।
-चैनाराम चौधरी, निदेशक, ड्रोम मार्बल प्राइवेट लिमिटेड, किशनगढ़, अजमेर



You may also like

Leave a Comment