Wednesday, July 1, 2026 |
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भारत अनुसंधान यात्रा- 2024 पहुंची सीयूजी, शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्यों पर चर्चा हुई

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/गांधीनगर
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), शिक्षा मंत्रालय, स्प्रिंगर नेचर के साथ मिलकर 19 सितंबर से 17 अक्टूबर 2024 तक भारत अनुसंधान यात्रा- 2024 का आयोजन कर रहा है। शनिवार को अनुसंधान यात्रा-2024 गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय पहुंची। यात्रा का उद्देश्य भारतीय अनुसंधान के बारे में जागरूकता पैदा कर रिसर्च इको सिस्टम को मजबूत करना है।
विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में स्प्रिंगर नेचर इंडिया के प्रबंध निदेशक वेंकटेश सर्वसिद्धि ने अवलोकन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय में वृक्षारोपण एवं शोध यात्रा की बस को हरी झंडी दिखाकर हुई। प्रो. भावना पाठक ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। इस दौरान काउंसिल सदस्य प्रो. किरण कुमार के. सलागमे, स्प्रिंगर नेचर की इंडेक्सिंग प्रमुख, सोनल शुक्ला, प्रबंधक आउटरीच रिया डादरा और एम. रंगनाथन ने विभिन्न शोध प्रकाशनों, रिसर्च इंटीग्रिटी, ओपन एक्सेस और ट्रांसफॉर्मेटिव एग्रीमेंट के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्प्रिंगर नेचर का उद्देश्य भारत से अनुसंधान के परिणामों को बढ़ावा देना और शोधकर्ताओं के साथ ही शैक्षणिक संस्थानों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि भारत शोध यात्रा-2024 प्रभावशाली अनुंसधान को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगी।
शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्यों पर हुई चर्चा : कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे ने उच्च गुणवत्ता वाले शोध और इसे प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित करने के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर शोध की अखंडता और भारतीय उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने में इसकी भूमिका पर एक फोकस समूह चर्चा का आयोजन भी किया गया। चर्चा में विश्वविद्यालय की प्रो. भावना पाठक, प्रो. पल्लवी शर्मा और प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने सक्रीय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे और प्रो. भावना पाठक द्वारा संपादित पुस्तक ‘Climate Change and Environmental Sustainability’ का विमोचन किया। इस दौरान स्प्रिंगर नेचर ने विश्वविद्यालय की 5 महिला शोधकर्ताओं को सम्मानित किया। इनमें डॉ. मानसी सिंह, डॉ. भक्ति गाला, डॉ. पंचमी प्रभाकरण, प्रो. पल्लवी शर्मा और प्रो. भावना पाठक शामिल हैं।



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