बिजऩेस रेमेडीज/मुंबई
बड़ौदा बीएनपी पारिबा म्यूचुअल फंड ने बड़ौदा बीएनपी पारिबा डिविडेंड यील्ड फंड के लॉन्च की घोषणा की। यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जो मुख्य रूप से डिविडेंड देने वाले शेयरों में निवेश करती है।
इस तरह के निवेश से निवेशकों की दौलत में 2 तरह से इजाफा होता है। एक तो शेयर में तेजी आने से और दूसरा डिविडेंड से होने वाली आय से। इस तरह से इस रणनीति का लक्ष्य उन कंपनियों में निवेश करना है जो डिविडेंड देती हैं और लगातार ग्रोथ दिखाती हैं। यह न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) 22 अगस्त से 5 सितंबर तक खुला रहेगा।
स्कीम के बारे में : बड़ौदा बीएनपी पारिबा डिविडेंड यील्ड फंड का लक्ष्य पूर्व अनुमानित और स्टेबल कैश फ्लो वाली कंपनियों में निवेश करना है, जिसका नेतृत्व ऐसे मैनेजमेंट द्वारा किया जाता है, जो नियमित रूप से डिविडेंड के साथ शेयरधारकों को लाभ देने को प्राथमिकता देते हैं। निवेश की रणनीति उन ग्रोथ कंपनियों में निवेशकों का पैसा लगाना है, जो निवेशकों को रेगुलर डिविडेंड और बायबैक के माध्यम से उनकी दौलत में इजाफा कर रही हैं। यह फंड हाई फ्री कैश फ्लो और रेगुलर डिविडेंड के भुगतान के इतिहास वाली कंपनियों में निवेश करेगा। यह फंड हर तरह के मार्केट कैप में उचित वैल्यू वाली कंपनियों का पोर्टफोलियो बनाने के लिए पांच चरण की चयन प्रक्रिया का पालन करता है। जबकि उन कंपनियों से दूरी बनाता है जो शायद ही कभी डिविडेंड देती हैं।
प्रमुख विशेषताएं वफायदे:
हायर फ्री कैश फ्लो : डिविडेंड देने वाली कंपनियों में अधिक फ्री कैश फ्लो होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके शेयर की कीमत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
प्रमोटर अलाइनमेंट : प्रमोटर्स द्वारा शेयरधारकों को डिविडेंड देकर लाभ पहुंचाना माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के साथ उनका जुड़ाव दिखाता है।
प्रदर्शन पर नजर : वित्त वर्ष 2009 के बाद से 16 में से 10 साल में, निफ्टी डिविडेंड अपॉर्च्यूनिटी 50 टीआरआई ने निफ्टी 500 टीआरआई इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। अगर किसी ने अक्टूबर 2007 में निफ्टी 500 टीआरआई में 1 लाख रुपये निवेश किया होता तो वह अब बढक़र अब 6.7 लाख रुपये हो गया होता। जबकि अक्टूबर 2007 में निफ्टी डिविडेंड अपॉच्र्यूनिटी 50 टीआरआई में निवेश किया गया 1 लाख रुपये 31 जुलाई, 2024 तक बढक़र 10.4 लाख रुपये हो गया होता। (सोर्स : एनएसई और इंटरनल रिसर्च. पिछला प्रदर्शन भविष्य में कायम रह भी सकता है और नहीं भी।)
डायवर्सिफिकेशन : अलग अलग सेक्टर और मार्केट कैपिटलाइजेशन में डाइवर्सिफिकेशन से फंड को लाभ होता है, जोखिम कम होता है और संभावित रिटर्न बढ़ जाता है। बड़ौदा बीएनपी पारिबा डिविडेंड यील्ड फंड का मैनेजमेंट 24 साल से अधिक के अनुभव वाले विशेषज्ञ शिव चानानी द्वारा किया जाएगा, जो बड़ौदा बीएनपी पारिबा एएमसी में इक्विटी के सीनियर फंड मैनेजर हैं।
बड़ौदा बीएनपी पारिबा एएमसी के सीईओ सुरेश सोनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2020 के बाद से निफ्टी 500 घटकों के एक अध्ययन के अनुसार, डिविडेंड देने वाली कंपनियों में एवरेज रिटर्न ऑन इक्विटी नॉन-डिविडेंड वाली कंपनियों की तुलना में अधिक मिलता है। वित्त वर्ष 2024 में, डिविडेंड देने वाली इन कंपनियों का औसत क्रह्रश्व 20.5 प्रतिशत था, जबकि नॉन-डिविडेंड पेमेंट करने वाली कंपनियों का औसत क्रह्रश्व 13.4 प्रतिशत था। फंड का लक्ष्य शेयरधारकों के अनुकूल मैनेजमेंट प्रैक्टिस के साथ हाई क्वालिटी वाले बिजनेस के पोर्टफोलियो में निवेश करना है।

