केंद्र सरकार ने पिछले दिनों आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में 70 साल से अधिक उम्र के सभी बुजुर्गों को शामिल करने को मंजूरी दे दी है, जो कि एक अच्छा कदम कहा जाएगा। इस फैसले से देश के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को पांच लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त मिल सकेगा। साथ ही, इतनी ही कीमत का हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी मिलेगा। फैसले की जरूरत इसलिए थी क्योंकि सोशल सिक्यॉरिटी के मामले में भारत बहुत पीछे है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 की रिपोर्ट से भी पता चलता है कि देश में ऐसे परिवारों की संख्या केवल 41 फीसदी है, जिनके कम से कम एक सदस्य का हेल्थ इंश्योरेंस हो। बिहार, महाराष्ट्र जैसे बड़ी आबादी वाले राज्यों में तो यह राष्ट्रीय औसत के करीब आधे के बराबर है। हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर यह उदासीन रवैया हमारी उस आदत की वजह से है, जिसमें ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि जब बीमारी आएगी तो देखा जाएगा। बहुत से लोग जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा को एक ही चीज समझ लेते हैं। लेकिन, जब बीमारी सिर पर आती है, तो पूरे घर के बजट को तोडक़र रख देती है। सरकार का मौजूदा कदम कई परिवारों को ऐसे आर्थिक दुष्चक्र में फंसने से बचा सकता है। वहीं भारत में इलाज दिनों-दिन महंगा होता जा रहा है। भारत में 2023 में मेडिकल इन्फ्लेशन 9.6 फीसदी थी, जो मौजूदा साल में 11 फीसदी हो सकती है। कोरोना के दौर में पूरे एशिया में चिकित्सा पर महंगाई की सबसे ज्यादा मार हिंदुस्तान पर ही पड़ी थी। तब हमारे यहां मेडिकल इन्फ्लेशन 14 फीसदी चीन से भी ज्यादा हो गई थी। जहां एक ओर देश में दिल से जुड़े रोगों और डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत में हर साल लगभग 58 लाख लोगों की मौत होती है। इनमें सबसे ज्यादा लोग मरते हैं हार्ट डिजीज और कैंसर से। वहीं सरकार ने बजट में स्वास्थ्य के लिए कोटा बढ़ाया है। हालांकि चीन और अमेरिका की तुलना में यह अब भी कम है। मेडिकल इंफ्रा बढ़ाने के साथ यह इंतजाम भी करना होगा कि आम जनता उसका फायदा उठा सके। सरकार का हालिया फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि योजना को सही ढंग से लागू किया जाए।

