- भारत आईपीओ के लिए ग्लोबल हब बन रहा है और अगले दो वित्तीय वर्षों में 1000 से अधिक आईपीओ आने की संभावना
- भारत के पूंजी बाजार और मर्चेंट बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने के लिए नई योजनाओं को किया गया पेश
मुंबई, 21 जनवरी 2025: एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) ने मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में 13वें वार्षिक सम्मेलन की सफल मेजबानी की। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम की थीम ‘उभरती वैश्विक महाशक्ति में आईपीओ’था, जिसमें 1000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें उद्योग विशेषज्ञ, नियामक और बाजार के जानकार शामिल थे। सम्मेलन में भारत की आर्थिक प्रगति में आईपीओ की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई।
सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच, सेबी के होलटाइम मेम्बर अश्विनी भाटिया, सेबी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनोज कुमार, एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष कुमार चौहान और बीएसई के एमडी और सीईओ श्री सुंदररामन आर. जैसे जाने—मानी हस्तियों की मौजूदगी में सम्मेलन में भारत की रिकॉर्ड-तोड़ आईपीओ उपलब्धियों और पूंजी बाजार गतिविधि के लिए एक ग्लोबल हब के रूप में इसके उभरने पर प्रकाश डाला।
एनएसई और बीएसई के नेतृत्व के मुख्य सत्रों ने यह उजागर किया कि स्टॉक एक्सचेंजों की आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि सेबी की चेयरपर्सन के साथ एक इंटरएक्टिव सत्र में भारत के आईपीओ पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने वाली नियामक नवाचारों पर ध्यान केंद्रित किया गया। आकर्षक पैनल चर्चाओं में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें स्टार्टअप्स को आईपीओ सफलता तक पहुंचाना, एसएमई आईपीओ में विकास के अवसर, भारत के आईपीओ ढांचे को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सुधारना, आईपीओ के लिए वैश्विक मानक और पूंजी बाजारों के भविष्य को आकार देने वाली बाजार रूझान शामिल थे।
एआईबीआई ने मर्चेंट बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र को और सशक्त करने और भारत के बढ़ते पूंजी बाजारों का समर्थन करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पहलों का अनावरण किया:
एआईबीआई की पहली वार्षिक पत्रिका:एक वार्षिक पत्रिका, जिसमें उद्योग की जानकारी, कानूनी अपडेट्स, और भारत के प्राथमिक बाजार का विश्लेषण शामिल है, साथ ही AIBI की पुरानी और भविष्य की पहलों का विवरण है।
एसएमई मेनुअल: एसएमई आईपीओ के लिए ऑफर दस्तावेजों की तैयारी को मानकीकरण करने की एक गाइड, जिसे स्टॉक एक्सचेंजों के सहयोग से विकसित किया गया।
पूंजी निर्माण पर श्वेत पत्र: भारत की दस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा पर एक श्वेत पत्र, जिसमें नगदी के रूझान और मर्चेंट बैंकरों की भूमिका पर चर्चा की गई है।
एआईबीआई सदस्यता डेटाबेस: मर्चेंट बैंकरों के प्रदर्शन को ट्रैक करने के लिए एक टूल, जिसमें लेन-देन का रिकॉर्ड और ऑपरेशनल मेट्रिक्स शामिल हैं।
मर्चेंट बैंकिंग में प्रमाणपत्र कार्यक्रम: एनआईएसएम के साथ मिलकर छह महीने का रेजिडेंशियल कार्यक्रम, जो मर्चेंट बैंकिंग क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करेगा।
एआईबीआई और एमबीएन के बीच एमओयू: मर्चेंट बैंकर्स एसोसिएशन ऑफ नेपाल (एमबीएएन) के साथ साझेदारी, जो सीमा पार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए है।
13वें वार्षिक सम्मेलन पर बात करते हुए एआईबीआई के प्रेसिडेंट महावीर लुनावत ने कहा, ‘इस साल के सम्मेलन में जो पहलें शुरू की गई हैं, वे मजबूत और भविष्य के लिए तैयार मर्चेंट बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के दिशा में एक अहम कदम हैं। नई पहलें कई अहम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हैं, जैसे कुशल पेशेवरों की बढ़ती मांग और मानक प्रथाओं की जरूरत। ये प्रयास एआईबीआई की नवाचार, पारदर्शिता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दिखाते हैं, ताकि देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।’

