बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन भारत की विकास गाथा के प्रेरक कारक होंगे। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के 58वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने 2025 के स्नातक वर्ग को बधाई दी और उनसे अपनी कौशल, फुर्ती और दृष्टि का उपयोग कर देश को ‘विकसित भारत 2047’ की ओर ले जाने का आह्वान किया।
गोयल ने भारत की विकास गाथा में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि एआई, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और इनोवेशन का निर्माण, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर परिवर्तनकारी प्रभाव हो सकता है। हर साल भारत से निकलने वाले 2.3 मिलियन एसटीईएम स्नातकों की विशाल संख्या के साथ मिलकर ये प्रगति विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम कर सकती है और उद्योगों व सेवाओं को सशक्त बना सकती है, साथ ही पिरामिड के निचले तबके को भी ऊपर उठा सकती है।
मुंबई में सीआईआई, एनएसडीसी, किंड्रिल और आईबीएम के साथ एक स्किल डेवलपमेंट सेंटर चलाने के अपने अनुभव को साझा करते हुए मंत्री ने बताया कि कैसे साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र भी साइबरसिक्योरिटी जैसी नई-युग की टेक्नोलॉजी को तेजी से आत्मसात कर लेते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की युवा आबादी (जिसकी औसत आयु 28.4 वर्ष है) ही देश की सबसे बड़ी ताकत है, जो 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की यात्रा को संभव बनाएगी।
गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की दृष्टि का उल्लेख किया, ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर साइबरसिक्योरिटी, डीप टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी में अग्रणी स्थान प्राप्त करना होगा और राष्ट्र को गौरवान्वित करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार की आर्थिक दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि यह एक विकसित राष्ट्र — ‘विकसित भारत’ बनाने में निहित है, जो देश में जन्म लेने वाले हर बच्चे के लिए समृद्धि सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने कहा कि इसका फोकस लचीलापन, स्थिरता, समावेशन और इनोवेशन-प्रेरित विकास पर है, जिसका उद्देश्य जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना, ग्रामीण-शहरी खाई को पाटना, गरीबी कम करना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस व ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना है। भारत की मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक बुनियाद, कम मुद्रास्फीति और सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए गोयल ने भारत में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले से ही 2,500 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां भारत में मौजूद हैं। यह अभूतपूर्व अवसर राष्ट्र की नियति को युवाओं के सक्षम हाथों में सौंपता है।
आईआईएफटी के चांसलर और वाणिज्य विभाग के सचिव सुनील बार्थवाल ने अपने संबोधन में कहा कि लचीलापन, अनुकूलनशीलता और नैतिक नेतृत्व वे परिभाषित गुण होंगे, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की निरंतर सफलता को आकार देंगे। आने वाले अवसरों के बारे में उन्होंने छात्रों से अपनी आकांक्षाओं को राष्ट्र के बड़े लक्ष्यों के साथ जोडऩे का आग्रह किया और याद दिलाया कि अपने करियर में उठाया गया उनका हर कदम देश की प्रगति में योगदान देता है।

