Saturday, July 25, 2026 |
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भारत में AI आधारित व्यवस्था से कम हो सकता है $ 130-170 बिलियन का कर्ज अंतर

by Business Remedies
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केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि भारत में एआई आधारित ऋण प्रणाली देश की अर्थव्यवस्था में मौजूद $ 130-170 बिलियन के ऋण अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। सरकार के अनुसार, मजबूत डिजिटल ढांचे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मेल से देश में वित्तीय समावेशन को नई गति मिल रही है।

सरकारी बयान में कहा गया कि एआई आधारित व्यवस्था लोगों की सहमति से साझा किए गए आंकड़ों और उन्नत विश्लेषण की मदद से ऋण वितरण प्रक्रिया को अधिक मजबूत बना रही है। इससे छोटे कारोबारियों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, ग्रामीण आबादी और महिला उद्यमियों तक औपचारिक ऋण की पहुंच बढ़ेगी। साथ ही लोगों की गैर-औपचारिक उधारी पर निर्भरता भी कम होने की संभावना है। सरकार ने बताया कि Unified Lending Interface इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। इस मंच से अब तक 64 ऋणदाता संस्थाएं जुड़ चुकी हैं, जिनमें 41 बैंक और 23 गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं।

यह प्रणाली लोगों की डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण कर जोखिम का आकलन करती है। इसके जरिए नागरिकों को बिना रुकावट ऋण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें पहचान सत्यापन सेवाएं, भूमि रिकॉर्ड, सैटेलाइट सेवाएं और अन्य वित्तीय व गैर-वित्तीय आंकड़ों का उपयोग किया जाता है। सरकार के अनुसार, अब इस व्यवस्था का विस्तार Regional Rural Banks और District Central Co-Operative Banks तक भी किया जा रहा है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऋण प्राप्त करना आसान होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुरू की गई Account Aggregator व्यवस्था भी इस प्रणाली को मजबूती दे रही है। इसके तहत वित्तीय संस्थानों के बीच सुरक्षित और सहमति आधारित आंकड़े साझा किए जाते हैं। इससे दस्तावेजों की जरूरत कम होती है और ऋण मंजूरी प्रक्रिया तेज होती है। सरकार ने बताया कि 2.6 बिलियन से अधिक खातों को आंकड़े साझा करने योग्य बनाया जा चुका है, जबकि 252.9 मिलियन से अधिक उपभोक्ता अपने खाते इस व्यवस्था से जोड़ चुके हैं।

इसके अलावा JAM व्यवस्था के तहत देश में 144 करोड़ से अधिक आधार संख्या जारी हो चुकी हैं। वहीं 58.16 करोड़ जन धन खातों में कुल जमा राशि ₹.3 लाखकरोड़ से अधिक पहुंच गई है। मोबाइल कनेक्टिविटी और 5G सेवाओं के विस्तार से भी डिजिटल पहुंच मजबूत हुई है। फरवरी 2026 में Digital India BHASHINI Division और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच समझौता हुआ था। इसका उद्देश्य बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को विभिन्न भारतीय भाषाओं में अधिक सुलभ बनाना है।



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