Saturday, October 31, 2026 |
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त्योहारी सीजन में व्यापारिक गतिविधियों में आएगा उछाल

by Business Remedies
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punit jain

देशभर में नवरात्रि ,रामलीला, गरबा और डांडिया जैसे उत्सवों की इन दिनों धूम मची हुई है। जो हर वर्ष दस दिन तक मनाए जाते हैं। इन उत्सवों के चलते इस बार बार व्यापारिक गतिविधियों में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। कैट की पिछले दिनों जारी एक रिपोर्ट में भी बताया गया है कि अगले दस दिनों में देश भर में लगभग 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार होने की उम्मीद है। अकेले दिल्ली में ही लगभग आठ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार होने की संभावना है। इन उत्सवों के दौरान बाजारों में रौनक बढऩे की उम्मीद है, जिससे व्यापारियों को काफी फायदा होगा। इस बार त्यौहारों में खरीदी की विशेष बात यह है कि बिक्री किया जाने वाले ज्यादातर भारतीय उत्पाद ही होंगे। अब लोगों का चीन से बने सामानों से मोहभंग हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश भर में भारतीय सामानों की गुणवत्ता को बढ़ाया है और अब भारत में बने सामान किसी भी विदेशी सामान से बेहतर हैं और यही कारण है कि उपभोक्ता का रुझान अब भारतीय वस्तुओं की खरीदी पर ही है। वहीं देश भर में नवरात्रि, रामलीला, गरबा और डांडिया जैसे एक लाख से ज्यादा छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनसे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। इस साल इन त्योहारों का समापन विजयदशमी, दुर्गा विसर्जन, करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, भाई दूज, छठ पूजा और तुलसी विवाह तक चलेगा। राजस्थान व दिल्ली में ही करीब डेढ़ हजार से अधिक रामलीलाएं होती हैं, जबकि सैकड़ों दुर्गा पूजा के पंडाल सजाए जाते हैं। मूल रूप से गुजरात से शुरू हुए डांडिया और गरबा के आयोजन अब देशभर में व्यापक रूप से होते हैं। इन त्योहारों को सौभाग्य और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। इन त्योहार के दौरान पारंपरिक कपड़ों जैसे साड़ी, लहंगा, और कुर्ता की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है। लोग पूजा और धार्मिक आयोजनों के लिए नए कपड़े खरीदते हैं, जिससे कपड़ा व्यापार में तेजी आती है। पूजा सामग्री जैसे नारियल, चुनरी, दीपक, और अगरबत्ती की भी भारी मांग रहती है, जिससे बाजारों में रौनक बढ़ती है। इसके अलावा त्योहारों में सजावट की वस्तुएं जैसे दीये, बंदनवार, रंगोली सामग्री और लाइटिंग की भी खूब खरीदारी होती है। इसके अलावा, हलवा, लड्डू, बर्फी जैसी मिठाइयों की खपत भी बढ़ जाती है। इस दौरान फलों और फूलों की मांग में भी बढ़ोतरी देखी जाती है



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