भारत में त्योहारी सीजन उमंग, उत्साह और खुशियों का पर्याय है। बाजार रोशनी से जगमगा उठते हैं और हर तरफ उत्सव का माहौल होता है। पर इस चकाचौंध के बीच आम आदमी को अपनी सेहत, सुरक्षा और बजट के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है। त्योहारों का असली आनंद तभी है, जब हम उल्लास के साथ-साथ आवश्यक सतर्कता भी बरतें। आम लोगों को इस दौरान अपनी आर्थिक और शारीरिक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। त्योहारी सेल और लुभावने विज्ञापनों के जाल में फंसकर अनावश्यक खर्चों से बचना समझदारी है। इसके अलावा, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन के बीच साइबर ठग भी काफी सक्रिय हो जाते हैं, इसलिए किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने या ओटीपी साझा करने से बचना चाहिए। त्योहारों में मिठाइयों की मांग आसमान छूने लगती है, जिसका फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। त्योहारी सीजन में सबसे बड़ी चिंता खाद्य पदार्थों में मिलावट की होती है। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में कुछ दुकानदार दूध, मावा, घी, तेल, मसालों और मिठाइयों में मिलावट करते हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। आम लोगों को चाहिए कि वे खुले में बिकने वाली मिठाइयों और संदिग्ध खाद्य पदार्थों की खरीदारी से बचें। विश्वसनीय दुकानों से सामान खरीदें, पैकेट पर निर्माण एवं समाप्ति तिथि, गुणवत्ता चिह्न और सामग्री की जानकारी अवश्य देखें तथा खरीदारी का बिल लें। किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें। वहीं, सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि त्योहारों से पहले बाजारों में नियमित जांच अभियान चलाएं। दूध, मावा, घी, तेल और मिठाइयों के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाए। मिलावटखोरों के खिलाफ केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कदम उठाए जाएं। दोषियों पर जुर्माना लगाने के साथ उनके लाइसेंस रद्द करने और आवश्यकतानुसार मुकदमा चलाने की व्यवस्था हो। जांच अभियान की पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। त्योहारों पर पटाखों का उपयोग भी एक गंभीर चिंता का विषय है। तेज आवाज और जहरीला धुआं बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और पशु-पक्षियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। पटाखे खरीदते समय केवल अधिकृत विक्रेताओं से निर्धारित मानकों वाले उत्पाद खरीदने चाहिए

