Trustees ने जताई आपत्ति
New Delhi में Sir Dorabji Tata Trust यानी SDTT के वरिष्ठ trustees ने Venu Srinivasan और Vijay Singh पर Tata Sons की Listing का सार्वजनिक समर्थन कर Board Resolutions को कमजोर करने और fiduciary duties के उल्लंघन का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में एक पत्र Noel N Tata, Darius J. Khambata, Neville N. Tata और Bhaskar Bhat ने हस्ताक्षर कर जारी किया है।
Unlisted Status पर रहा है पुराना रुख
Trustees का कहना है कि Tata Sons को unlisted बनाए रखना लंबे समय से Tata Trusts और कंपनी की तय नीति रही है। Tata Sons Board ने मार्च 2024 में सर्वसम्मति से कंपनी का unlisted status बनाए रखने का निर्णय लिया था। इसके बाद जुलाई 2025 में SDTT और Sir Ratan Tata Trust के trustees ने भी इसी रुख को दोहराया था।
Public Statements पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, trustees ने कहा कि जुलाई 2025 के Resolutions को अब तक वापस नहीं लिया गया है। इसके बावजूद Srinivasan और Singh ने संभावित Listing पर अपना बदला हुआ रुख trustees के सामने सामूहिक चर्चा के लिए नहीं रखा। उनके Public Statements से Trusts के Resolutions कमजोर पड़ सकते हैं और RBI के समक्ष Tata Sons की लंबित application पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
Merger Proposal भी चर्चा में
Trustees ने 28 सितंबर के उस Proposal का भी उल्लेख किया, जिसमें Tata Electronics Systems Solutions Private Limited और Tata Consulting Engineers को Tata Sons में merge करने की संभावना पर विचार किया गया था। इसे RBI के principal business criteria से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करते हुए unlisted status बनाए रखने के एक संभावित विकल्प के रूप में देखा गया।
Listing पर बढ़ा आंतरिक मतभेद
यह पूरा मामला Tata Trusts के भीतर इस सवाल पर बढ़ते मतभेद को दर्शाता है कि Tata Sons को unlisted रखा जाए या Regulatory Requirements को देखते हुए Public Listing की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

