नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में दुनियाभर से आए अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत विकास क्षमता और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे को रेखांकित किया। विशेषज्ञों ने कहा कि मजबूत आधारभूत ढांचा, बड़ा बाजार, युवा आबादी और आर्थिक विस्तार की संभावनाएं भारत को दुनिया भर के निवेशकों के लिए आकर्षक बना रही हैं। सम्मेलन में वैश्विक व्यापार व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु जोखिम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भारत की विकास क्षमता मजबूत, आर्थिक गति बनाए रखना चुनौती
स्वीडिश अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने कहा कि कोविड-19 के बाद भारत ने प्रभावशाली आर्थिक गति हासिल की है और देश की विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि ईरान से जुड़े संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। सरकार ने आम लोगों और कारोबारों को राहत देने के प्रयास किए हैं, लेकिन इससे सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ सकता है। वैश्विक संकटों के बीच विकास की गति बनाए रखना नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
जलवायु संकट से निपटने में भारत-ब्राजील की अहम भूमिका
ब्राजील स्थित क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के कार्यकारी निदेशक जुलियानो असुन्साओ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के सामने सबसे बड़ा साझा जोखिम है। भारत और ब्राजील इसके प्रभावों का सामना करने के साथ-साथ समाधान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। दोनों देशों के बीच ब्रिक्स जैसे मंचों के जरिए पहले से संस्थागत संबंध मौजूद हैं। भारतीय कंपनियों का ब्राजील में बढ़ता निवेश भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को मजबूत कर रहा है।
भारत-न्यूजीलैंड समझौते से आर्थिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री प्रो. जॉन गिब्सन ने कहा कि कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच महत्वपूर्ण संवाद का मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच मुक्त व्यापार समझौते आर्थिक स्थिरता दे सकते हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौते को उन्होंने अधिक व्यवस्थित और नियम आधारित आर्थिक सहयोग का उदाहरण बताया।
जापानी कंपनियों की भारत में बढ़ी निवेश रुचि
जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकोनॉमिक्स के निदेशक काजुतो सुजुकी ने कहा कि आज के दौर में अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति और आर्थिक रणनीति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। चीन के साथ जटिल संबंधों के बीच जापानी उद्योग भारत को महत्वपूर्ण और संभावनाओं वाले बाजार के रूप में देख रहे हैं। बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं और देश को लंबे समय के विकास एवं विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं।
बड़ा बाजार और युवा आबादी
बनी निवेश का आधार
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की बड़ी बाजार क्षमता, युवा आबादी और आर्थिक विस्तार की संभावनाएं विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही हैं। सम्मेलन में ऊर्जा, व्यापार और आपूर्ति शृंखला से जुड़े वैश्विक जोखिमों के बीच आर्थिक मजबूती बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बेहतर नीतियों के साथ भारत वैश्विक आर्थिक बदलावों में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

