Sunday, September 27, 2026 |
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17 साल बाद समान शर्तों पर हुआ भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता

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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शनिवार को कहा कि भारत ने लगभग 17 वर्षों की लंबी बातचीत के बाद यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बराबरी की शर्तों पर सफलतापूर्वक संपन्न किया है। उन्होंने कहा कि देश की अगली औद्योगिक विकास यात्रा में तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय विनिर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।
समझौता कई वर्षों से अटका हुआ था
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में संबोधित करते हुए प्रसाद ने भारत-ईयू एफटीए को सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई वर्षों तक अटका हुआ था और पहले बातचीत में ठोस प्रगति नहीं हो पा रही थी। उन्होंने कहा कि ईयू एफटीए पर 17 वर्षों से बातचीत चल रही थी। वे हमारे साथ आगे बढऩे को तैयार नहीं थे, लेकिन हमारी सरकार ने समान और संतुलित शर्तों पर समझौता करने में सफलता हासिल की।
विदेशी निवेश को लेकर भारत का दृष्टिकोण काफी बदला
गौरतलब है कि भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी, 2026 को इस व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी की थी। इसकी बातचीत वर्ष, 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई वर्षों तक ठप रहने के बाद 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया था। इसी महीने यूरोपीय आयोग ने समझौते को हस्ताक्षर और अंतिम मंजूरी के लिए यूरोपीय संघ परिषद के पास भी भेजा है। जितिन प्रसाद ने कहा कि विदेशी निवेश को लेकर भारत का दृष्टिकोण अब पहले से काफी बदल चुका है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार के रूप में देखे जाने के बजाय यह चाहता है कि विदेशी कंपनियां देश में विनिर्माण क्षमताओं के विकास और तकनीकी उन्नति में भी योगदान दें।
घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र होगा मजबूत
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री ने कहा कि भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने वाली विदेशी कंपनियों को संयुक्त उपक्रमों (ज्वाइंट वेंचर्स) के माध्यम से स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी करने और तकनीक हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाना होगा। हमें गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी और वैश्विक बाजार हमारे लिए तैयार बैठा है।
नई तकनीकों के विकास और अपनाने को मिलेगी गति
जितिन प्रसाद ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एआई उत्पादकता बढ़ाने, लागत कम करने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से डेटा सेंटर और एआई-आधारित तकनीकों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने राज्य में सैमसंग और योट्टा जैसी कंपनियों के निवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे नई तकनीकों के विकास और अपनाने को गति मिलेगी। एआई का व्यापक उपयोग भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाने और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा।



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