नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में अब तक (1 अप्रैल से 17 सितंबर तक) सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढक़र 12.12 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। यह जानकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से शुक्रवार को दी गई। सरकारी डेटा के मुताबिक, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक बढक़र 14.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
एसटीटी संग्रह में 53 प्रतिशत की वृद्धि
कॉर्पोरेट कर संग्रह 19.48 प्रतिशत बढक़र लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) से होने वाला कर संग्रह 6 प्रतिशत बढक़र 6.16 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 53 प्रतिशत बढक़र 40,214 करोड़ रुपए हो गया है।
रिफंड जारी करने में 29 फीसदी की बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान रिफंड जारी करने में 29 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई और यह 2.2 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया। 17 सितंबर तक एडवांस टैक्स संग्रह 16.18 प्रतिशत बढक़र 5.22 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसमें एडवांस कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 4.16 लाख करोड़ रुपए और नॉन-कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 9.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.06 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
राजकोषीय घाटा 4.55 लाख करोड़ रुपए रहा
पिछले महीने के आखिर में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष, 2026-27 के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में भारत का राजकोषीय घाटा 4.55 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य का 26.8 प्रतिशत है। यह पिछले साल इसी अवधि के राजकोषीय घाटा से कम है, जो 4.7 लाख करोड़ रुपए था और पूरे वित्त वर्ष के अनुमान का 29.9 प्रतिशत था। वित्त वर्ष,2027 के लिए केंद्र सरकार ने 16.96 लाख करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे का बजट रखा है, जो देश की जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटे लक्ष्य हासिल किया था और राजकोषीय समेकन के तहत मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इसे घटाकर जीडीपी का 4.3 प्रतिशत कर दिया है।
कीमतों में स्थिरता के कारण विकास का रास्ता खुला
राजकोषीय घाटे में कमी आने से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत होती है और कीमतों में स्थिरता के साथ विकास का रास्ता खुलता है। इससे सरकार की उधारी कम होती है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में कॉर्पोरेट्स और उपभोक्ताओं को कर्ज देने के लिए ज्यादा फंड बचता है और इससे आर्थिक विकास में तेजी आती है।
वृद्धि के ये रहे प्रमुख कारण
आर्थिक गतिविधियों और आय में बढ़ोतरी: अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ कंपनियों के मुनाफे, वेतन और अन्य करयोग्य आय में वृद्धि हुई। इससे कॉरपोरेट और व्यक्तिगत आयकर का आधार बढ़ा। एफवाई2024-25 में व्यक्तिगत/गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह की वृद्धि कॉरपोरेट कर से अधिक रही।
करदाता आधार का विस्तार: पिछले कुछ वर्षों में अधिक लोग और व्यवसाय आयकर व्यवस्था में आए हैं। सरकार के अनुसार एफवाई 2020-21 के 6.72 करोड़ की तुलना में एफवाई 2024-25 में लगभग 9.19 करोड़ आईटीआर दाखिल हुए, करीब 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
डिजिटलाइजेशन और बेहतर अनुपालन: ऑनलाइन आईटीआर, टीडीएस व टीसीएस डेटा, पेन-आधार तथा डेटा-आधारित जांच जैसी व्यवस्थाओं ने आय और लेन-देन को ट्रैक करना आसान बनाया है। इससे स्वैच्छिक अनुपालन बढऩे और कर चोरी की गुंजाइश घटने में मदद मिली। सरकार भी संग्रह में वृद्धि को बेहतर टैक्स-कम्प्लायंस और प्रशासनिक दक्षता से जोड़ती है।
टीडीएस व्यवस्था का विस्तार: स्रोत पर कर कटौती से सरकार को आय अर्जित होते समय ही कर प्राप्त हो जाता है। एफवाई 2024-25 के शुरुआती आंकड़ों में टीडीएस प्रत्यक्ष कर संग्रह का सबसे बड़ा घटक था।
शेयर बाजार में लेन-देन बढ़ा: सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स (एसटीटी)भी प्रत्यक्ष कर संग्रह में शामिल है। एफवाई 2024-25 में एसटीटी संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जो पूंजी बाजार में बढ़ी गतिविधि को दर्शाती है।

