तेल कीमतों में तेजी: West Asia में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि Brent Crude का $107-108 प्रति बैरल तक पहुंचना फिलहाल भारत के लिए Macro Crisis नहीं है। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कीमतों में तेजी कितने समय तक बनी रहती है और क्या इससे Physical Oil Supply प्रभावित होती है।
Forex Reserves मजबूत: भारत के पास मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा है। देश में महंगाई अपेक्षाकृत कम है और H1 FY26 में Current Account Deficit यानी CAD GDP का 0.8 प्रतिशत रहा। वहीं, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का Forex Reserves $44.9 billion बढ़कर रिकॉर्ड $785.7 billion हो गया।
लंबे समय तक महंगा तेल चिंता बढ़ाएगा: Infomerics Ratings के Chief Economist Dr. Manoranjan Sharma के मुताबिक, यदि Crude Oil कई महीनों तक $100 प्रति बैरल से ऊपर रहता है या West Asia से होने वाली Shipping प्रभावित होती है, तो Growth और Inflation के बीच संतुलन बिगड़ सकता है।
महंगाई और Fiscal Deficit पर असर: भारत अप्रैल-जनवरी FY26 के दौरान अपनी 88.6 प्रतिशत Crude Oil जरूरत Import से पूरी करता रहा। RBI के अनुमान के अनुसार Crude Oil की कीमत में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से Headline Inflation करीब 49 basis points बढ़ सकती है। सरकार यदि इसका बोझ खुद उठाती है, तो Fiscal Deficit पर करीब 43 basis points का असर पड़ सकता है।
किन सेक्टर्स पर दबाव: महंगे Crude से Airlines, Paints, Chemicals, Logistics, Cement और Consumer कंपनियों के Margins प्रभावित हो सकते हैं। वहीं ONGC और Oil India जैसी कंपनियों को ऊंची कीमतों से फायदा मिल सकता है। Analysts के अनुसार Renewable Energy, Electric Mobility और Domestic Gas जैसे सेक्टर्स में लंबे समय में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।

