नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारत की मेजबानी में 18वें ब्रिक्स समिट की बैठक नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुई। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों और पार्टनर देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। भारत की ब्रिक्स चेयरशिप में इस साल की थीम, ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ह्यूमैनिटी फस्र्ट की भावना पर आधारित लोगों को केंद्र में रखने वाले नजरिए को दर्शाता है। बैठक में ब्रिक्स देशों के बीच साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग मजबूत करने के तरीकों और वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारत की अध्यक्षता में इस साल 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन बैठकों के जरिए ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अब शिखर सम्मेलन में व्यावहारिक और विकास से जुड़े नतीजों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने पर फोकस रहेगा। पीएम मोदी ने भारत मंडपम में ब्रिक्स सदस्य देशों के बंद कमरे में हुए सत्र के समापन संबोधन में समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को भी मजबूत करने पर जोर दिया।
वैश्विक शांति और स्थिरता में ब्रिक्स निभाए बड़ी भूमिका
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों से वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को दुनिया में शांति और स्थिरता कायम करने में आगे रहना चाहिए। शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच ज्यादा सहयोग की जरूरत बताई। ब्रिक्स समिट में वैश्विक संघर्षों और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर चर्चा हो रही है। शी जिनपिंग ने कहा, चीन ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ मिलकर मिडिल ईस्ट और गल्फ क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने में अपनी भूमिका निभाएगा। उनका यह बयान मिडिल ईस्ट में जारी जंग और बढ़ते तनाव के बीच आया है। शी जिनपिंग ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट की जंग को लेकर चिंता जताई है।
ग्लोबल साउथ को रूल टेकर नहीं, रूल शेपर बनाना होगा
समिट में पीएम मोदी ने कहा, एआई, साइबर स्पेस, आउटर स्पेस, बायो टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज भविष्य के अवसरों के साथ वैश्विक नियम भी तय कर रहे हैं। ऐसे में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के जरिए ग्लोबल साउथ के युवा डिप्लोमैट्स और पॉलिसी मेकर्स को नेगोशिएशन स्किल्स, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और लीगल एक्सपर्टाइज दी जा सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि आज ‘यूनाइटेड नेशंस डे फॉर साउथ-साउथ कोऑपरेशन’ है और ग्लोबल साउथ को समर्पित इस दिन ऐसा फैसला विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि भारत इस विषय में लीड लेने के लिए तैयार है। पीएम मोदी ने कहा, यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। यही ब्रिक्स एट ट्वेंटी का संकल्प होना चाहिए।
अगले 20 साल महत्वाकांक्षी एजेंडे पर करना होगा काम
पीएम मोदी ने ब्रिक्स नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें वैश्विक मंच पर अपने काम को ठोस नतीजों में बदलना होगा। अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा। इसकी शुरुआत हमें अपने काम करने के तरीके से करनी होगी। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इसकी वजह से संस्थागत गति नहीं रुकनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा, वह ब्रिक्स कम्युनिटी कंटीन्यूटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म का प्रस्ताव रखते हैं। इसके तहत ट्रोयका के जरिए सभी पहलों और नतीजों का फॉलोअप किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाई जा सकती है। इसमें हर फैसले के साथ नोडल प्वाइंट, समय सीमा और उसे लागू करने की स्थिति दर्ज की जा सके।

