100 प्रक्षेपण और 548 उपग्रहों के साथ भारत ने रचा नया इतिहास
पिछले एक दशक में अंतरिक्ष क्षेत्र ने तेजी से विस्तार किया
चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को वैश्विक मंच पर पहुंचाया
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 100 प्रक्षेपण और कक्षा में 548 उपग्रहों के ऐतिहासिक पड़ाव के साथ भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, महत्वाकांक्षा और नवाचार की यात्रा का उत्सव है। चंद्रयान-1 और मंगलयान से लेकर चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 तक भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
चंद्रयान से आदित्य-एल1 तक भारत ने बढ़ाया अंतरिक्ष अभियान
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि चंद्रयान-1, मंगलयान, चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे मिशनों ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की क्षमता और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार अपनी महत्वाकांक्षाओं को विस्तार दिया है और अब देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम तकनीकी रूप से उन्नत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
युवाओं की ऊर्जा और नवाचार से अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ताकत
पुरी ने कहा कि भारत के प्रतिभाशाली युवाओं की ऊर्जा और नवाचार देश की अंतरिक्ष यात्रा को नई गति दे रहे हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे नए उद्यम और निजी क्षेत्र के नवाचारी भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए साहसी विचारों को नई संभावनाओं में बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से देश में अंतरिक्ष आधारित तकनीक और सेवाओं के विकास को भी बल मिल रहा है।
चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचकर रचा ऐतिहासिक अध्याय
23 अगस्त 2023 को इसरो ने चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के दक्षिणी धू्रव के पास सफलतापूर्वक उतारा था। इसके साथ भारत अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना। भारत चंद्रमा के ऊबड़-खाबड़ दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश भी बना। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दी।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का उत्सव
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता की याद में पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त 2024 को मनाया गया। इसका उद्देश्य केवल चंद्रयान-3 की उपलब्धि का स्मरण करना नहीं था, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धियों को भी सामने लाना था। इस अवसर पर देश की वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया जाता है।
चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर किए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग
14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा से एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित चंद्रयान-3 को तीन प्रमुख क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया था। इनमें चंद्रमा पर सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग, उसकी सतह पर रोवर का संचालन और सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करना शामिल था।
लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर विक्रम लैंडर से बाहर निकला और लैंडर पर लगे उपकरणों के साथ मिलकर वैज्ञानिक प्रयोग करने लगा। इन प्रयोगों के दौरान चंद्रमा की सतह के तापमान, भूकंपीय गतिविधियों, प्लाज्मा वातावरण और वहां मौजूद तत्वों की संरचना का अध्ययन किया गया। इससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह के उस हिस्से को करीब से समझने का अवसर मिला, जिसके बारे में पहले सीमित जानकारी उपलब्ध थी।
इसरो अपने मिशन के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में पूरी तरह सफल रहा। लैंडर और रोवर ने एक चंद्र दिवस तक काम किया, जो पृथ्वी के लगभग 14 दिनों के बराबर होता है। इस मिशन ने भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने के साथ भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण आधार तैयार किया।
पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में भारत विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में अंतरिक्ष कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभर रहा है। 100 प्रक्षेपण और 548 उपग्रहों का पड़ाव भारत के बढ़ते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र, वैज्ञानिक क्षमता और वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

