वर्तमान में कई देश युद्ध की विभिषिका से जूझ रहे हैं। पर उन्हें नहीं मालूम कि युद्ध पूरी तरह से अपने देश के साथ दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को भी गड़बड़ा देता है। मानवीय, पर्यावरणीय, आर्थिक और राजनीतिक परिणामों को तहस-नहस कर देता है। ऐसा ही युद्ध नागासाकी का हुआ। जो आज तक पुराने लोगों के जहन में है। वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण की जरूरत के बारे में जागरूकता और देशों को युद्ध के बजाय संवाद के माध्यम से संघर्षों को सुलझाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आज नागासाकी दिवस मनाया जाएगा। अमेरिका ने वर्ष,1945 में आज के दिन जापान के नागासाकी शहर पर फैट मैन नामक परमाणु बम गिराया था। इससे भारी तबाही हुई और हजारों लोग मारे गए। मूल लक्ष्य कोकुरा था, लेकिन खराब मौसम के कारण बमवर्षक विमान को नागासाकी की ओर मोडऩा पड़ा। फैट मैन एक प्लूटोनियम आधारित परमाणु बम था, जिसकी विस्फोटक क्षमता लगभग 21 किलोटन टीएनटी थी। बम को बी-29 सुपरफोर्टे्स बॉकस्कर के जरिए पहुंचाया गया था। विस्फोट ने शहर के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया, जिसमें घर, उद्योग, स्कूल और अस्पताल शामिल थे। इसमें करीब 40,000 से अधिक की मृत्यु हो गई, जबकि चोटों और विकिरण के संपर्क में आने के कारण 1945 के अंत तक मरने वालों की संख्या बढक़र लगभग अस्सी हजार हो गई। हिरोशिमा पर हुई बमबारी के साथ-साथ इस बमबारी ने 15 अगस्त, 1945 को जापान के आत्मसमर्पण में योगदान दिया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ। 1946 से नागासाकी दिवस प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को पीडि़तों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और विश्व शांति, परमाणु निरस्त्रीकरण और भविष्य के परमाणु संघर्षों की रोकथाम को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन हमें परमाणु युद्ध के भयानक परिणामों की याद दिलाता है। यह विश्व में शांति और परमाणु हथियारों को खत्म करने का संदेश देता है।

