New Delhi,
केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नवनिर्मित Navi Mumbai Airport के माध्यम से दवाओं के आयात की अनुमति दे दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के इस फैसले के बाद अब देश में दवाओं के आयात के लिए अधिकृत प्रवेश केंद्रों की संख्या बढ़कर 42 हो गई है। सरकार का मानना है कि इससे औषधि आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी, दवाओं की आवाजाही अधिक सुगम बनेगी और व्यापार को भी गति मिलेगी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि Drugs Rules, 1945 के Rule 43A में संशोधन कर Navi Mumbai Airport को उन हवाई अड्डों की सूची में शामिल किया गया है, जहां से दवाओं का आयात किया जा सकेगा। यह निर्णय देश की औषधि आपूर्ति प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और आयात प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, यह अधिसूचना Drugs Technical Advisory Board से परामर्श के बाद Drugs And Cosmetics Act, 1940 के प्रावधानों के तहत जारी की गई है। सरकार का कहना है कि इस संशोधन से दवा खेपों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी, लॉजिस्टिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आयातकों को दवाओं के आयात के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा।
सरकार का यह भी कहना है कि यह पहल नियामकीय व्यवस्था को और सशक्त बनाने, व्यापार प्रक्रिया को आसान करने तथा कारोबार को बढ़ावा देने की दिशा में जारी प्रयासों का हिस्सा है। साथ ही आयातित दवाओं की प्रभावी निगरानी भी पहले की तरह सुनिश्चित की जाएगी। इससे पहले जून महीने में केंद्र सरकार ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया था। इसका उद्देश्य परीक्षण, जांच और विश्लेषण के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाना था। यह प्रक्रिया सामान्य रूप से Form 11 के माध्यम से पूरी की जाती है।
नए संशोधन के तहत अब कम मात्रा में परीक्षण और गैर-नैदानिक विश्लेषण के लिए आयात की जाने वाली सभी दवाओं के लिए स्वीकृति आधारित नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे पहले आवश्यक लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी, जबकि अब इस व्यवस्था से आवेदकों पर अनुपालन का बोझ काफी कम होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही औषधि क्षेत्र से जुड़े नवाचार आधारित उद्यमों और उद्योगों को परीक्षण एवं विश्लेषण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने में सुविधा मिलेगी। इससे औषधि क्षेत्र में कारोबार करना पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज होगा।

