भारत के ऑटो उद्योग ने 6July को जारी आँकड़ों के अनुसार जून में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज किया। 25,57,234 वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 21.83 प्रतिशत अधिक रही। वहीं, मई के मुकाबले भी बिक्री में 1.03 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह जानकारी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स द्वारा जारी आँकड़ों में सामने आई। यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री जून में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रही। इस दौरान 4,10,853 यात्री वाहनों की बिक्री हुई, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 28.63 प्रतिशत और मई के मुकाबले 2.05 प्रतिशत अधिक रही। यह जून महीने का अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना गया। ग्रामीण क्षेत्रों में यात्री वाहनों की मांग लगातार मजबूत बनी रही, जहां बिक्री में 35.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह वृद्धि 24.67 प्रतिशत रही।
फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने बताया कि पहली बार यात्री वाहनों में सीएनजी, हाइब्रिड और ईवी वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी 40.35 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके साथ ही 31,823 इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री दर्ज की गई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की ओर बढ़ रहा है।
दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री भी रिकॉर्ड स्तर पर रही। जून में 18,28,458 दोपहिया वाहनों की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.22प्रतिशत अधिक रही। हालांकि, मई के मुकाबले इसमें मामूली 0.89प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वाहन विक्रेताओं के अनुसार शुरुआती श्रेणी के वाहनों की मांग मजबूत रही। पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम के बाद वाहन निर्माताओं की आपूर्ति बेहतर हुई, जिससे बाजार को मजबूती मिली। साथ ही, दोपहिया ईवी की हिस्सेदारी पहली बार 10.60 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 7.34प्रतिशत थी। वाणिज्यिक वाहनों की खुदरा बिक्री भी जून में शानदार रही। इस दौरान 90,972 वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16.88 प्रतिशत अधिक रही। ग्रामीण क्षेत्रों में इस श्रेणी की बिक्री में 21.63 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कृषि और परिवहन गतिविधियों में तेजी का संकेत मिला।
तीनपहिया वाहनों की बिक्री भी नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई। जून में 1,20,889 तीनपहिया वाहनों की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16.20 प्रतिशत अधिक रही। इस श्रेणी में ईवी की हिस्सेदारी बढ़कर 64.08 प्रतिशत हो गई, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। ट्रैक्टर बिक्री में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। जून में 1,00,818 ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25.31 प्रतिशत और मई के मुकाबले 21.33 प्रतिशत अधिक रही। विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन की तैयारियों और बेहतर मानसून की उम्मीदों ने ट्रैक्टरों की मांग को मजबूती दी।
वाहन विक्रेताओं का भरोसा भी बाजार को लेकर सकारात्मक बना हुआ है। 51.24 प्रतिशत डीलरों का मानना है कि आने वाले महीनों में बिक्री में और वृद्धि होगी। वहीं 41.79 प्रतिशत डीलरों को बाजार स्थिर रहने की उम्मीद है, जबकि केवल 6.97 प्रतिशत डीलरों ने बिक्री में गिरावट की आशंका जताई है। सीएस विग्नेश्वर के अनुसार आने वाले समय में सामान्य मानसून, खरीफ बुआई में तेजी, पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम के बाद आपूर्ति व्यवस्था का सामान्य होना और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ऑटो उद्योग की वृद्धि को और मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।

