नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारत और खाड़ी देशों के बीच प्रस्तावित गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गुजरात को ओमान और अन्य खाड़ी देशों से जोड़ने वाली किसी भी गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन परियोजना पर फिलहाल कोई विचार नहीं किया जा रहा है। इस स्पष्टीकरण के बाद इस परियोजना को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि हाल के दिनों में कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि भारत सरकार तथाकथित “मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन” पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। इन रिपोर्टों में कहा गया था कि यह परियोजना गुजरात को ओमान तथा अन्य खाड़ी देशों से जोड़ सकती है और ऊर्जा आपूर्ति को नया आयाम दे सकती है।
हालांकि मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में साफ कहा कि ऐसी किसी परियोजना का प्रस्ताव वर्तमान में मंत्रालय के विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ओमान या किसी अन्य खाड़ी देश के साथ इस संबंध में किसी भी स्तर पर कोई सक्रिय चर्चा या वार्ता नहीं चल रही है। सरकार ने कहा कि यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया गया है ताकि इस विषय पर फैल रही सभी तरह की अटकलों और भ्रम को समाप्त किया जा सके। सरकार के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल भारत और खाड़ी देशों के बीच समुद्र के नीचे ऊर्जा पाइपलाइन बिछाने की कोई आधिकारिक योजना नहीं है।
इस बीच, समुद्री परिवहन क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है। माल्टा ध्वज वाला एलएनजी वाहक पोत “दिशा”, जिसका संचालन भारतीय नौवहन निगम के नेतृत्व वाले एक समूह द्वारा किया जा रहा है, सोमवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरा। यह पोत गुजरात के दहेज बंदरगाह के लिए लगभग 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस लेकर आ रहा है और इसके 18 June 2026 को भारत पहुंचने की संभावना है। सरकार ने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, विदेशों में भारतीय मिशनों, नौवहन कंपनियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार के अनुसार देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन सामान्य बना हुआ है और कहीं भी भीड़भाड़ या व्यवधान की कोई सूचना नहीं है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, भारत समुद्री सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। हाल ही में ओमान तट के निकट एक वाणिज्यिक पोत पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी थी। इस घटना में “एमटी सेत्तेबेलो” पोत पर सवार तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद नौवहन महानिदेशालय ने महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है।
नौवहन महानिदेशालय ने नौवहन कंपनियों और समुद्री भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक पश्चिम एशिया के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की तैनाती सीमित रखी जाए। इसके अतिरिक्त, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले पोतों के कप्तानों को उच्च स्तर की सुरक्षा सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी गई है। निर्देशों के अनुसार पोत संचालकों को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी चेतावनियों और नौवहन संबंधी सूचनाओं पर लगातार नजर रखनी होगी। साथ ही जहाजों की सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक उपायों और कंपनी की सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।

